० तेज धूप से बचने, सूती कपड़े पहनने और ओ.आर.एस. के निरंतर उपयोग की सलाह
सुकमा, 10 मार्च (आरएनएस)। राज्यस्तरीय मौसम विभाग ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को देखते हुए 15 मार्च से जून 2026 तक भीषण गर्मी और लू की संभावना जताई है। गर्मी के कारण जन-स्वास्थ्य प्रभावित होने और जलजनित रोगों के बढऩे के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही रोकथाम और उपचार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं! आम जनता को लू के लक्षणों जैसे सिरदर्द, तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, शरीर में दर्द और बेहोशी के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बचाव के लिए अनिवार्य न होने पर बाहर न निकलने, सिर और कान को कपड़े से ढकने, पर्याप्त पानी पीने और सूती कपड़े पहनने पर जोर दिया गया है। अस्वस्थ महसूस होने पर 104 आरोग्य सेवा केंद्र से नि:शुल्क परामर्श या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करने का निर्देश है कलेक्टर अमित कुमार के द्वारा अस्पतालों के लिए विशेष प्रबंधन के निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक अस्पताल में लू के मरीजों के लिए कम से कम दो बिस्तर आरक्षित करना अनिवार्य है। ओपीडी में आने वाले हर मरीज की लू के लक्षणों के लिए जांच की जाएगी और वार्डों में कूलर तथा ठंडे पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, दूर से आने वाले मरीजों के लिए रुकने का प्रबंध और ओ.आर.एस. कॉर्नर भी बनाए जाएंगे। दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जिला अस्पताल से लेकर उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक स्टॉक की सूची जारी की गई है। इसमें आई.व्ही. सेट, ओ.आर.एस. पैकेट, और बुखार की दवाओं (जैसे पैरासिटामोल) की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने को कहा गया है। गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। निगरानी के लिए जिला और विकासखण्ड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे और मोबाइल चिकित्सा दल भी तैनात रहेंगे। 15 मार्च 2026 से लू के मरीजों की दैनिक जानकारी आई.एच.आई.पी. ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
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