देहरादून,10 मार्च (आरएनएस)। दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास की अगुआई में मंगलवार को भव्य नगर परिक्रमा निकाली गई। नगर परिक्रमा में करीब 25 हजार से अधिक संगतों ने भाग लिया। सुबह 7:30 बजे श्री दरबार साहिब से शुरू हुई परिक्रमा का दूनवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। पूरे मार्ग में गुरु राम राय जी महाराज और श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। सिद्धयोगी गुरु राम राय जी महाराज के जन्मोत्सव और श्री झंडे जी मेला के तीसरे दिन निकलने वाली इस ऐतिहासिक नगर परिक्रमा का स्वागत करने के लिए दूनवासी पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं। नगर परिक्रमा जहां-जहां से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने संगत का फूल बरसाकर स्वागत किया और जगह-जगह लंगर व जलपान की व्यवस्था की गई। भजन-कीर्तन और ढोल की थाप के बीच संगत गुरु भक्ति में सराबोर नजर आई।नगर परिक्रमा कांवली रोड होते हुए श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बिंदाल पहुंची, जहां संगत को चने, मुरमुरे और गुड़ का प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद परिक्रमा तिलक रोड और टैगोर विला होते हुए घंटाघर देहरादून पहुंची। यहां का दृश्य अत्यंत भावुक और भव्य रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने संगत पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और गुरु महाराज के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इसके बाद नगर परिक्रमा पलटन बाजार देहरादून से होते हुए लक्खीबाग पुलिस चौकी और रीठा मंडी पहुंची। यहां से संगत श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बॉम्बे बाग पहुंची, जहां गन्ने का प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद संगत समाधि स्थल श्रीमहंत साहिबान पर माथा टेकने पहुंची। दोपहर करीब 11:45 बजे नगर परिक्रमा वापस श्री दरबार साहिब पहुंचकर पूरी हुई।श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने कहा कि ऐतिहासिक नगर परिक्रमा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में संगतें देहरादून पहुंचती हैं। दूनवासियों ने अतिथि देवो भव: की परंपरा निभाते हुए प्रेम, स्नेह और सद्भावना के साथ संगतों का स्वागत किया, जिससे संगतें भाव-विभोर हो गईं। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है।नगर परिक्रमा के बाद श्री दरबार साहिब में खुशी का प्रसाद वितरित किया गया। इसके उपरांत अन्य राज्यों से आई अधिकांश संगतें अपने गृह जनपदों के लिए रवाना हो गईं। नगर परिक्रमा के दौरान भजन-कीर्तन और ढोल की थाप पर संगतों ने गुरु भक्ति में नृत्य करते हुए पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।
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