नई दिल्ली 11 march, (Rns): देशभर में गहराते एलपीजी संकट की आंच अब भारतीय रेलवे की पटरियों तक पहुंच गई है। रसोई गैस की भारी कमी के कारण इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) की खानपान सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि रेलवे अब ट्रेनों में अस्थायी रूप से पका हुआ भोजन (Cooked Food) परोसने की सेवा बंद करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ऐसे में जिन यात्रियों ने टिकट बुकिंग के साथ खाने का भुगतान पहले ही कर दिया है, उन्हें रेलवे रिफंड देने की योजना बना रहा है।
आईआरसीटीसी के बेस किचन में थमी आंच
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, गैस संकट का सबसे बड़ा प्रहार आईआरसीटीसी के उन बेस किचनों पर पड़ा है, जहां हजारों यात्रियों के लिए रोजाना खाना तैयार किया जाता है। आमतौर पर ट्रेनों की पेंट्री कार का इस्तेमाल केवल खाना गरम करने और वितरण के लिए होता है, जबकि मुख्य खाना इन्हीं बेस किचनों में तैयार होकर लोड किया जाता है। एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत के चलते अब इन किचनों में लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भोजन तैयार करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है, जिससे पूरी सप्लाई चेन ठप होने की कगार पर है।
वैकल्पिक ईंधन और कंटिन्जेंसी प्लान लागू
संकट को देखते हुए आईआरसीटीसी ने 10 मार्च को एक आधिकारिक पत्र जारी कर अपने सभी कैटरिंग लाइसेंसधारकों, फूड प्लाजा संचालकों और जन आहार आउटलेट्स को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों को भोजन सेवा में बाधा न आए, इसके लिए तत्काल प्रभाव से ‘कंटिन्जेंसी प्लान’ (वैकल्पिक व्यवस्था) लागू की जाए। स्टेशनों पर स्थित रिफ्रेशमेंट रूम्स को हिदायत दी गई है कि वे एलपीजी की कमी की स्थिति में खाना पकाने के लिए अन्य वैकल्पिक ईंधन या बिजली आधारित संसाधनों का उपयोग करें।
यात्रियों के लिए बढ़ सकती है परेशानी
रेलवे के इस संभावित फैसले से उन लाखों यात्रियों को परेशानी हो सकती है जो लंबी दूरी की यात्रा के दौरान पूरी तरह रेलवे के भोजन पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, आईआरसीटीसी का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ रहा है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह के भ्रम या असुविधा से बचाया जा सके। यदि एक-दो दिनों में गैस आपूर्ति बहाल नहीं होती है, तो यात्रियों को घर से भोजन साथ लाने या केवल रेडी-टू-ईट (पैकेट बंद) फूड पर ही निर्भर रहना पड़ सकता है।

