0 सनातन संस्कृति की विशेषता है सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता – गौतमचंद पारख
राजनांदगांव, 11 मार्च (आरएनएस)। साकेत साहित्य परिषद ,सुरगी के बैनर तले वरिष्ठ सदस्य एवं गीतकार नंद किशोर साव नीरव के संयोजन में होली मिलन समारोह एवं रंगझाझर कवि गोष्ठी का आयोजन सुरगी में किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि गौतमचंद पारख, समाज सेवी राजनांदगांव थे एवं अध्यक्षता आत्मा राम कोशा अमात्य, जिला समन्वयक राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध व्यंग्यकार शत्रुघ्न सिंह राजपूत राजनांदगांव, प्रभात तिवारी अध्यक्ष,प्रगतिशील लेखक संघ राजनांदगांव, देवनारायण नंगरिहा वरिष्ठ सदस्य , मधुर साहित्य परिषद डौंडीलोहारा , अलख राम यादव वरिष्ठ सदस्य,पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा, छुरिया,अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा,अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति राजनांदगांव, महेन्द्र कुमार बघेल मधु, अध्यक्ष शिवनाथ साहित्य धारा डोंगरगांव, वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू पूर्व अध्यक्ष, शिवनाथ साहित्य धारा डोंगरगांव,हर्षा देवांगन कवयित्री डौंडीलोहारा की उपस्थिति रही।
प्रथम सत्र में विचार गोष्ठी
ज्ञानदायिनी मां शारदे की पूजा अर्चना के बाद पटेल मेडम ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।
स्वागत भाषण देते हुए ओमप्रकाश साहू अंकुर, अध्यक्ष साकेत साहित्य परिषद सुरगी ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं काव्य रसिकों होली की शुभकामनाएं दी। संक्षिप्त में साकेत साहित्य परिषद की विकास यात्रा को बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गौतमचंद पारख ने कहा कि परस्पर सद्भावना, सामाजिक समरसता , सत्य और अहिंसा हमारी सनातन संस्कृति की विशेषता है।
हमें ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे मनुष्यों के साथ जीव- जंतुओं को भी कष्ट पहुंचे।
हमारे देश के महापुरुषों सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र,गौतम बुद्ध, भगवान महावीर,राजा राम मोहन राय, गुरु नानक,गुरु घासीदास बाबा,स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी ने सदैव सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चल कर विभिन्न सामाजिक कुरितियों एवं बुराईयों पर प्रहार कर जनजागरण का काम किया। इसके लिए उन्हें तरह- तरह के कष्ट सहने पड़े ,लेकिन वे अपने पुनीत लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। गौतम चंद पारख ने शाकाहार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अपनी जीभ के स्वाद के लिए बेजुबान प्राणियों पर अत्याचार करना सबसे बड़ा अधर्म है। शराब और विभिन्न प्रकार के नशा लोगों को पथभ्रष्ट की ओर ले जाते है। ऐसे लोगों के घर में शांति नहीं रहती। पारख ने आगे कहा कि आप कितना भी बड़ा साहित्यकार,कवि या उद्योगपति या राजनीतिज्ञ हो जावें यदि आप जो भी लिखते और कहते हैं, उसमें से कही गयी बातों को यदि पच्चीस प्रतिशत भी अपने जीवन में पालन नहीं कर रहे हैं तो सब व्यर्थ है। भारतीय संस्कृति दुनिया की एक अनोखी संस्कृति है। व्यवस्था के चलते भाई -भाई भले अलग रहें परंतु प्रेम एवं भाई चारा के दरवाजा एक दूसरे के लिए सदैव खुला रखें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार आत्मा राम कोशा अमात्य ने कहा कि होली पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पर्व में गरीब से लेकर धनवान सभी लोग प्रेम के रंग में रंग कर सद्भावना एवं भाईचारे की भावना को चरितार्थ करते हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू ने कहा कि हमको वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर जीवन में आगे बढऩा चाहिए। प्रकृति से खिलवाड़ कर हम सुखी नहीं रह सकते। आगे उन्होंने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे महतारी भाषा में खूब लिख कर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध बनावें। हिंदी में लिखते एवं बोलते समय जो त्रुटियां होती है , उन्हें दूर करने के लिए पूरी शिद्दत एवं ईमानदारी से मेहनत करें।
द्वितीय सत्र में रंग झाझर कवि गोष्ठी
होली मिलन समारोह के द्वितीय सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार शत्रुघ्न सिंह राजपूत ,राजनादगाव की अध्यक्षता एवं परिषद के उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना के सरस संचालन में रंग झाझर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया ,जिसमें छत्तीस रचनाकारों ने फागुन,बसंत ऋतु, प्रेम, देशभक्ति से ओतप्रोत रचना के साथ ही हास्य- व्यंग से भरपूर कविताआँ और सुमधुर गीतों से कार्यक्रम को और भी सरस और मधुर बना दिया। काव्य पाठ/ गीत प्रस्तुत करने वालों में नंद किशोर साव नीरव,कैलाश साहू कुंवारा, राज कुमार चौधरी रौना, फकीर प्रसाद साहू फक्कड़, रूपल साहू, गुमान सिंह साहू, आनंद राम सार्वा, सचिन निषाद,अमृत दास साहू,मदन मंडावी,मनीष साहू मन,अलख राम यादव, हर्षा देवांगन, पवन यादव पहुना,दिलीप यादव, लखन लाल साहू लहर, कुलेश्वर दास साहू, ओमप्रकाश साहू अंकुर, वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू, अखिलेश्वर प्रसाद साहू, महेन्द्र कुमार बघेल मधु, प्रभात तिवारी, शत्रुघ्न सिंह राजपूत, आत्मा राम कोशा अमात्य शामिल थे।
इस अवसर पर कुंज राम साहू, महावीर साहू,रेखा लाल साहू,डा. एस कुमार साहू, खिलेश्वर साहू, गजानंद साहू सहित अन्य काव्य रसिक श्रोताओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन पवन यादव पहुना एवं आभार प्रदर्शन संयोजक कवि नंद किशोर साव नीरव ने किया।
0
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

