राजनांदगांव 14 मार्च 2026(आरएनएस) शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस वर्ष गुरुवार से हो रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरुवार से नवरात्रि आरंभ होने पर माता दुर्गा का आगमन डोली पर माना जाता है, जिसे शास्त्रों में चुनौतियों या संघर्ष का संकेत बताया गया है। हालांकि नवरात्रि के अंत में माता का प्रस्थान हाथी पर होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। हाथी पर गमन अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य भोला पंडित (राजीव नगर) के अनुसार इस बार लगभग 72 वर्षों बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। 19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाले चैत्र नवरात्रि में अमावस्या तिथि के साये में ही कलश स्थापना की जाएगी। प्रतिपदा तिथि के क्षय होने के बावजूद इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होगी, लेकिन सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्र सम्मत विधि से उसी समय घट स्थापना का विधान बनेगा। इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग भी बनेगा, जिसे भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला श्रेष्ठ समय सुबह 6:02 बजे से 8:40 बजे तक रहेगा, जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 9:16 बजे से 10:56 बजे तक होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सेवा पंडालों की तैयारी शुरू
चैत्र नवरात्रि को लेकर डोंगरगढ़ मार्ग पर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुर्ग के अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक हर साल की तरह इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। इसके लिए मंदिर समिति और सेवादारों ने तैयारी शुरू कर दी है। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक कर सेवा पंडालों की व्यवस्था और रूट पर आवश्यक सुविधाओं की तैयारी के निर्देश दिए हैं।

