नई दिल्ली 14 March, : केंद्रीय बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को राहत देने और नियमों को आसान बनाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में कई अहम संशोधन किए गए हैं। ये सभी नए नियम और बदलाव 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू होने जा रहे हैं। सरकार ने जहां एक तरफ ITR फाइल करने की डेडलाइन में ढील दी है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार और टीसीएस (TCS) से जुड़े नियमों में बड़े फेरबदल किए हैं। टैक्सपेयर्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि नए वित्त वर्ष में उनकी जेब और टैक्स प्लानिंग पर इसका क्या सीधा असर पड़ने वाला है।
पुराने कानून की छुट्टी, लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट 2025
देश में दशकों से चले आ रहे इनकम टैक्स एक्ट 1961 की अब आधिकारिक तौर पर छुट्टी होने जा रही है। इसकी जगह 1 अप्रैल 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) से ‘नया इनकम टैक्स एक्ट 2025’ सभी टैक्सपेयर्स पर लागू हो जाएगा। अर्थव्यवस्था और तकनीक में हुए बड़े बदलावों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पुरानी दरें ही पहले की तरह लागू रहेंगी। साथ ही सरकार ने विदेशी संपत्ति का खुलासा करने का एक बार का मौका भी दिया है।
आईटीआर (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख में मिली बड़ी ढील
कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को सरकार ने बड़ी राहत दी है। जिन टैक्सपेयर्स का ऑडिट नहीं होता है, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 फाइल करने की आखिरी तारीख अब बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। यह नया नियम सीधे तौर पर वित्त वर्ष 2025-26 पर लागू हो जाएगा। वहीं, नौकरीपेशा और आम करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की अंतिम तिथि में कोई बदलाव नहीं हुआ है, यह पहले की तरह ही 31 जुलाई निर्धारित रहेगी। इसके अलावा टैक्स ऑडिट की आखिरी तारीख भी 31 अक्टूबर ही बनी रहेगी।
रिवाइज्ड रिटर्न की नई डेडलाइन, लेकिन अतिरिक्त शुल्क की शर्त
अगर आपसे ITR भरते समय कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त समय मुहैय्या करवाया है। अब रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर संबंधित वित्त वर्ष की 31 मार्च कर दी गई है। हालांकि, इसमें एक बड़ी शर्त यह जोड़ी गई है कि 31 दिसंबर के बाद अगर कोई टैक्सपेयर अपना रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करता है, तो उसे इसके लिए अतिरिक्त शुल्क या पेनल्टी चुकानी होगी। देर से रिटर्न (Belated Returns) भरने की समय सीमा में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
टीसीएस (TCS) की दरों में हुआ अहम फेरबदल
बजट 2026 में रिफंड की देरी और नियमों की उलझन को खत्म करने के लिए टीसीएस की दरों को काफी हद तक तर्कसंगत बनाया गया है। नए नियमों के मुताबिक 1 अप्रैल से शराब, कबाड़ (स्क्रैप) और मिनिरल्स (कोयला, लौह अयस्क आदि) की बिक्री पर टीसीएस की दर 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दी गई है। इसके उलट, तेंदू पत्ते की बिक्री पर इसे 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी किया गया है। विदेश पैसे भेजने (LRS) के मामले में भी बड़ी राहत दी गई है। शिक्षा, मेडिकल या अन्य किसी भी काम के लिए विदेश भेजी गई रकम पर डबल टैक्स का झंझट खत्म करते हुए टीसीएस दरें एक समान रूप से 2 फीसदी कर दी गई हैं।
शेयर बाजार के F&O ट्रेडर्स को STT का तगड़ा झटका
भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए ये नए नियम किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। सरकार ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में भारी इजाफा कर दिया है। घोषणा के अनुसार, 1 अप्रैल से फ्यूचर्स पर STT 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया जाएगा। वहीं, ऑप्शंस के लेनदेन पर यह टैक्स 0.1 फीसदी से बढ़ाकर सीधा 0.15 फीसदी कर दिया गया है, जिससे ट्रेडर्स की लागत में सीधा असर पड़ेगा।
शेयर बायबैक और डिविडेंड इनकम पर टैक्स की सख्ती
कंपनियों द्वारा किए जाने वाले शेयर बायबैक को लेकर भी नियमों में सख्ती की गई है। अब 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक से मिलने वाली किसी भी रकम पर ‘कैपिटल गेन्स’ के रूप में टैक्स वसूला जाएगा, जबकि पहले इसे ‘डीम्ड डिविडेंड’ माना जाता था। प्रमोटर्स को अलग से डिफरेंशियल बायबैक टैक्स (कॉर्पोरेट के लिए 22 फीसदी और नॉन-कॉर्पोरेट के लिए 30 फीसदी) देना होगा। वहीं, डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर ब्याज खर्चों की जो 20 फीसदी कटौती की छूट पहले मिलती थी, उसे भी पूरी तरह हटा दिया गया है। अब डिविडेंड इनकम पर आपके स्लैब रेट के हिसाब से पूरा टैक्स लगेगा।

