० बोलेगा बचपन पुरस्कार से नवाजे गए 14 नवाचारी शिक्षक
जगदलपुर, 14 मार्च (आरएनएस)। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण और नवाचार की इबारत लिखते हुए बस्तर जिले में जिला स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिला शिक्षा विभाग और ओपन लिंक्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन शिक्षकों को मंच प्रदान किया गया, जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता से बस्तर की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है। यह पूरा अभियान कलेक्टरआकाश छिकारा के कुशल नेतृत्व और जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के भीतर छिपी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। इस गरिमामयी समारोह के दौरान जिले के 14 चुनिंदा शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘बोलेगा बचपनÓ पुरस्कार एवं सम्मान से नवाजा गया। सम्मानित होने वाले इन शिक्षकों में वैशाली त्यागी, गीता सिन्हा, पूर्णिमा मांडवी, अपर्णा पॉल, संगीता शोरी, रिंकी नेताम, उपासना साहू, रीना साहू, किरण तिवारी, थलेश गंजीर, कामेश्वरी कश्यप, खिरमनी तिवारी, ऋतु राजवाड़े और नोगेश्वर कुमार साहू शामिल हैं। इन सभी शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से हटकर अभिनव प्रयोग किए और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार ओपन लिंक्स फाउंडेशन के ‘आचार्य विनोबा भावे सहायक शिक्षक कार्यक्रमÓ की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके अंतर्गत ‘पोस्ट ऑफ द मंथÓ जैसी पहलों के माध्यम से उन शिक्षकों को पहचान दी जा रही है जो बच्चों के भाषा कौशल, कविता पाठ और स्पोकन इंग्लिश जैसी गतिविधियों में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम में उपस्थित जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल और जिला मिशन समन्वयक अशोक पांडे ने शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षक ही समाज की असली और मजबूत नींव हैं। उनके समर्पण से ही बच्चों का भविष्य सशक्त बनता है और शिक्षा विभाग व सामाजिक संगठनों का यह समन्वय बस्तर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नई दिशा दे रहा है। कार्यक्रम में एपीसी परमेश्वर पांडे और बीआरसी बस्तर अजम्भर कोर्राम सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी और फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देने और भविष्य में भी शिक्षा सुधार के संकल्प को दोहराने के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ, बल्कि इसने बस्तर में ‘नवाचारी शिक्षाÓ के प्रति एक नया उत्साह भी पैदा किया है।
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