पैसा देने और देख लेने की भी धमकी, अपशब्द पशब्द लिखने वाले छात्रों और अभिभावकों से होगी पूछताछ
प्रयागराज 15 मार्च (आरएनएस)। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान हैरान कर देने वाले कई मामले सामने आए हैं। कुछ छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं में परीक्षकों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है, वहीं कई उत्तर पुस्तिकाओं में पास कराने के लिए नोट, मोबाइल नंबर और यहां तक कि पैसों का प्रलोभन देने जैसी बातें भी लिखी मिली हैं। इस पूरे मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया है कि ऐसे मामलों में संबंधित छात्र, उनके अभिभावक और संबंधित महाविद्यालय के प्रबंधन को एक साथ विश्वविद्यालय बुलाकर पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह जानना जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों में छात्रों ने परीक्षा जैसी गंभीर प्रक्रिया में इस तरह की हरकत की।
मूल्यांकन कार्य में लगे कई परीक्षकों ने विश्वविद्यालय को लिखित रूप से शिकायत भेजी है कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में छात्रों ने प्रश्नों के उत्तर देने के बजाय परीक्षक को संबोधित करते हुए अपमानजनक शब्द लिखे हैं। कहीं-कहीं छात्रों ने सीधे-सीधे अनुरोध किया है कि उन्हें किसी तरह पास कर दिया जाए, जबकि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में मोबाइल नंबर लिखकर संपर्क करने का आग्रह किया गया है।
इन घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चिंतित
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में कथित रूप से पैसे देने का संकेत भी दिया गया है। इन घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चिंतित कर दिया है। कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था की गरिमा और शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। यदि कोई छात्र उत्तर पुस्तिका का दुरुपयोग करता है या परीक्षकों के प्रति असम्मानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय जल्द ही ऐसे सभी मामलों में नोटिस जारी करेगा। नोटिस के माध्यम से संबंधित छात्रों, उनके अभिभावकों और महाविद्यालय के प्राचार्यों या प्रबंधन प्रतिनिधियों को तलब किया जाएगा। पूछताछ के दौरान यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि क्या यह छात्रों की व्यक्तिगत गलती है या इसके पीछे किसी तरह की गलत सलाह या दबाव भी काम कर रहा है।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद दोषी पाए जाने पर छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसमें परीक्षा परिणाम पर प्रभाव पडऩे से लेकर भविष्य की परीक्षाओं में प्रतिबंध जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
कुलपति ने कहा कि परीक्षा उत्तरपुस्तिका केवल ज्ञान और समझ का आकलन करने का माध्यम होती है। इसमें इस प्रकार की भाषा या प्रलोभन लिखना न केवल शैक्षणिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा को भी ठेस पहुंचाता है। इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि छात्रों को यह संदेश देना भी है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, सम्मान और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण मूल्य हैं।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

