संस्थागत-उद्योग अंतर कम करने, जीसीसी को मजबूत करने और वैल्यू क्रिएशन तेज करने पर जोर
नई दिल्ली, 19 मार्च (आरएनएस)। भारत के कॉस्ट अकाउंटेंट्स संस्थान (ICMAI) ने नई दिल्ली में आयोजित ‘राइज़ इंडिया लीडरशिप समिट 2026’ का सफल समापन करते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स (CMA) की भूमिका पर एक स्पष्ट और ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया। समिट में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और वित्त क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारत की आर्थिक प्रगति में रणनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत इस वैधानिक संस्थान ने स्पष्ट किया कि समिट का मुख्य फोकस संस्थानों और उद्योग के बीच मौजूद अंतर को कम करना, वैल्यू क्रिएशन को गति देना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को मजबूत करना रहा, ताकि भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। शांग्री-ला इरोस में आयोजित इस समिट का विषय था – “स्ट्रैटेजिक लीडरशिप फॉर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर – सीएमएज़ ऐज़ आर्किटेक्ट्स ऑफ वैल्यू क्रिएशन एंड कैपेबिलिटी ऑगमेंटेशन”। समिट के दौरान संस्थागत, नियामकीय और संचालन स्तर पर मौजूद चुनौतियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव सामने आए, जो भारत की विकास यात्रा को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। समिट का समापन इस ठोस सहमति के साथ हुआ कि आईसीएमएआई और अन्य हितधारक मिलकर संस्थागत ढांचे को और मजबूत करेंगे, प्रणालीगत अंतर को दूर करेंगे और भारत की आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करेंगे, जिससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

