नई दिल्ली 20 March, (Rns) : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल-गैस के वैश्विक संकट के बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। इस कानून के तहत अब पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़े उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग से संबंधित सभी कंपनियों को सरकार के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) को ताज़ा डेटा देना अनिवार्य होगा।
पीपीएसी, पेट्रोलियम मंत्रालय का डेटा संग्रहण विभाग है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी राजपत्र अधिसूचना में पीपीएसी को सूचना एकत्र करने, संकलित करने, संरक्षित रखने और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे आपात स्थिति में तेल मंत्रालय को प्रभावी योजना बनाने में मदद मिलेगी। धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाएगा, जिसके लिए जेल की सजा का प्रावधान है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराना है। यह कानून जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने में भी मदद करता है, जिससे देश में खाद्य और आपूर्ति सुरक्षा बनी रहती है।
धारा 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। इसके तहत स्टॉक सीमा तय करने, व्यापार को विनियमित करने, कीमतें निर्धारित करने और जमाखोरी पर रोक लगाने का अधिकार है। वहीं, धारा 5 के तहत केंद्र सरकार इन शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप सकती है, ताकि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। देश लगभग 40 देशों से कच्चा तेल मंगाता है, जिनमें वेनेजुएला, रूस और अमेरिका प्रमुख हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक गैस का आयात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से किया जाता है।

