लखनऊ ( आरएनएस ), 20 मार्च, 2026नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राणि उद्यान स्थित सारस प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अरुण कुमार (राज्यमंत्री, वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वी. हेकली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और प्रकृति प्रेमी शामिल हुए।कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। प्राणि उद्यान के निदेशक संजय कुमार बिश्वाल ने अपने संबोधन में कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारी जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शहरीकरण और प्रदूषण के कारण तेजी से लुप्त होती जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में दाना-पानी रखें, घोंसलों की व्यवस्था करें और कीटनाशकों का कम प्रयोग करें।मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि गौरैया पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह कीट-पतंगों को खाकर खेती और मानव जीवन की रक्षा करती है तथा बीजों के प्रसार में भी सहायक होती है। उन्होंने बताया कि आधुनिक भवन निर्माण शैली के कारण गौरैया के प्राकृतिक आवास कम हो गए हैं, जिससे उनकी संख्या में गिरावट आई है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों में पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करें।विश्व गौरैया दिवस पहली बार 20 मार्च 2010 को मनाया गया था और आज यह वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्यावरणीय दिवस बन चुका है। इस अवसर पर प्राणि उद्यान में जागरूकता स्टॉल लगाए गए, जहां गौरैया संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी गई और घोंसले, मिट्टी के पात्र तथा दाना-पानी का नि:शुल्क वितरण किया गया।कार्यक्रम के तहत क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिनमें विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अलावा हाल ही में आयोजित प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर प्राणि उद्यान के शिक्षा अधिकारी अभिषेक दुबे को भी सम्मानित किया गया।समारोह के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत त्रिपाठी ने किया।
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