: स्वर्णिमा सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी हर्रैया, नोडल अफसर यक्ष एप, एएचटीयु, परिवार परामर्श व मिशन शक्ति, बस्ती
फर्जी जमानत के रैकेट के करीब पहुंची पुलिस , जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा मुंडेरवा क्षेत्र के रहने वाले पेशेवर जमानतदार से पूछताछ शुरू
कानूनी प्रक्रिया को चकमा देने वाले आए पुलिस के रडार पर
बस्ती 20 मार्च (आरएनएस)। पुलिस ने अदालतों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपराधियों की जमानत कराने वाले एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश करने के करीब है। पुलिस की जांच अब उस गिरोह तक पहुंच गई है जो पेशेवर तरीके से जमानतदार बनकर कानूनी प्रक्रिया को चकमा दे रहा था। इस मामले में एक व्यक्ति की पहचान कर उसे हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले मामले सामने हैं। पुलिस को पिछले कुछ समय से अदालती कार्यवाही के दौरान सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग संदिग्ध रूप से बार-बार अलग-अलग अपराधियों के लिए जमानतदार (श्योरटी) बन रहे हैं। पुलिस को पिछले कुछ समय से अदालती कार्यवाही के दौरान सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमानत लेते हैं। पुलिस ने कोर्ट रिकार्ड और जमानत के लिए जमा किए गए दस्तावेजों का मिलान किया, तो एक ही व्यक्ति के कई मामलों में जमानतदार होने की बात सामने आई। जांच में पता चला कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रैकेट है। जांच-पड़ताल में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ही फोटो का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों से आधार कार्ड और पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। जमानत के लिए जो जमीन या संपत्ति के कागज (खतौनी आदि) कोर्ट में पेश किए गए, वे या तो जाली हैं या उनमें हेरफेर किया गए जा रहे हैं। यह गिरोह उन अपराधियों को निशाना बनाता था जिनका कोई स्थानीय ठिकाना नहीं होता था, और उनसे जमानत के बदले मोटी रकम वसूलता है। आशंका है कि इस फर्जीवाड़े की मदद से कई गंभीर अपराधी जेल से बाहर आने में सफल रहे होंगे। पुलिस जल्द ही इस मामले में गिरफ्तारियां भी कर सकती है।
आरोपित की पहचान, मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े एक प्रमुख व्यक्ति की पहचान कर ली है। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। मुंडेरवा क्षेत्र का रहने वाला व्यक्ति सोनहा क्षेत्र में एनडीपीएस में गिरफ्तार आरोपित पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के रहने वाले की जमानत कैसे और क्यों ली है।
शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस खेल में कचहरी परिसर के आसपास सक्रिय कुछ बिचौलिए और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले कंप्यूटर आपरेटर भी शामिल हो सकते हैं।
एक आरोपित को चिन्हित किया गया है और जल्द ही इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि अब तक कितनी फर्जी जमानतें ली जा चुकी हैं। पुलिस अब उन सभी फाइलों को खंगाल रही है जिनमें पिछले तीन माह के भीतर संदिग्ध लोगों ने जमानत ली है।
: डा.यशवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक, बस्ती
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