0 विश्व गौरैया दिवस, होली, ईद, महिला सशक्तिकरण पर हुआ काव्य पाठ
0 युद्ध से हो रहे विनाश पर भी पढ़ी गई कविता
रायपुर, 21 मार्च (आरएनएस)। संकेत साहित्य समिति द्वारा राजधानी रायपुर के वृंदावन हॉल में कल शुक्रवार 20 मार्च को विश्व कविता दिवस की पूर्व संध्या पर सरस काव्य -गोष्ठी आयोजित की गई। यह गोष्ठी गौरैया दिवस, होली, ईद और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित थी । दुनिया के कुछ देशों में युद्ध से हो रहे विनाश पर भी काव्य -पाठ हुआ । इन सभी विषयों पर पचास से अधिक स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं से देश और दुनिया को सार्थक सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया ।
गोष्ठी में सुप्रसिद्ध भाषा विज्ञानी और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.चित्तरंजन कर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अध्यक्षता जाने -माने लेखक और कवि गिरीश पंकज ने की । विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार शकुंतला तरार, नीलू मेघ और के.पी.सक्सेना ‘दूसरेÓ उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरंभ में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना के पश्चात समिति द्वारा अतिथियों का अंगवस्त्र, मोतियों की माला एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए डॉ.चित्तरंजन कर ने कहा कि अपनी रचनाएँ सुनाने वाले के भीतर दूसरों के विचारों को भी सुनने का माद्दा होना चाहिए । सुनने और गुनने से प्रतिभा में निखार आता है। गिरीश पंकज ने कहा कि काव्य गोष्ठियाँ रचनाकारों के लिए कार्यशाला की तरह होती हैं । इनमें शामिल होने से नये सृजन को बल मिलता है।संकेत साहित्य समिति के संस्थापक और प्रांतीय अध्यक्ष डॉ माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंगÓ ने स्वागत भाषण में समिति की दीर्घकालीन साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का प्रतिबिंब होता है,जिसे साहित्यकार शब्दों के माध्यम से चित्रित करता है। कवयित्री पल्लवी झा ने गोष्ठी का संचालन किया। गोष्ठी में जिन कवियों और कवयित्रियों ने काव्य -पाठ किया, उनमें डॉ.चित्तरंजन कर , गिरीश पंकज , डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंगÓ, के.पी. सक्सेना ‘दूसरे, नीलू मेघ, शकुंतला तरार, डॉ.सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव, पल्लवी झा, सुषमा पटेल, पूर्वा श्रीवास्तव, गोपाल जी सोलंकी, छबि लाल सोनी, डॉ.रविन्द्र सरकार, हरीश कोटक, माधुरी कर, रीना अधिकारी, दिलीप वरवंडकर, शिवशंकर गुप्ता,मन्नूलाल यदु , लवकुश तिवारी, यशवंत यदु , देवाशीष अधिकारी, चेतन भारती, राजकुमार सोनी, रामचंद्र श्रीवास्तव, विवेक रहाटगाँवकर , कुमार जगदलवी,अम्बर शुक्ला ‘अम्बरीश ‘, राजेन्द्र ओझा, डॉ.गोपा शर्मा, डॉ. मृणालिका ओझा, अनीता झा,राकेश अग्रवाल, नीलिमा मिश्रा, कल्याणी तिवारी ‘कोकीÓ, गणेश दत्त झा, बी.बी.पी.मोदी, डॉ.एन.पी.यादव, लतिका भावे, मुरलीधर गोंडाने, रूनाली चक्रवर्ती, नर्मदा प्रसाद विश्वकर्मा, सीमा पांडे, आर.सी.राम, नीलिमा मिश्रा, भारती यादव मेधा, नितेश ठाकुर, योगेश शर्मा ‘योगीÓ, बलजीत कौर,एकता शर्मा, श्रद्धा पाठक,शिवशंकर गुप्ता और महेश गुप्ता आदि शामिल थे । होली नारी सशक्तिकरण ,गौरैया दिवस एवं सामयिक परिवेश पर केन्द्रित नयी चेतना, नयी परिकल्पना एवं नयी विचारधाराओं से संबंधित पढ़ी गईं कुछ रचनाओं के प्रमुख अंश निम्नानुसार हैं- मेरा रिश्ता गौरैया से / मेरे घर में उसका घर है / मेरे कमरे के कोने में / उसका घर मेरे ऊपर है डॉ. चित्तरंजन कर
आँगन में तू आ गौरैया / फिर से गाना गा गौरैया/ आ ना, तेरे लिये रखा है / पानी औ दाना गौरैया / बिन तेरे जीवन ये कैसा/ सबको ये समझा गौरैया
-गिरीश पंकज
माथे पर चिन्ता रूपी /पसीने की बूंदों के नन्हें -नन्हें से कण/मिटटी में गिरता देख/अपार सुख की अनुभूति से सराबोर/नए घर में रहने के सुख का /सपना संजोती/बस्तर की नारी
शकुंतला तरार
युद्ध की विभीषिका / लील जाएगी सारा कुछ/ मचेगा त्राहिमाम् / नही बचेगा कोई। न युद्ध थोपने वाले / और न ही युद्ध झेलने वाले।
-नीलू मेघ ‘नीलमÓ
ईद की खुशी क्या होती हैं दोस्त जान जाओगे / जब हामिद की तरह तुम भी चिमटा खरीद कर लाओगे/ मैं भी ईद में ईदी लेकर आया हूँ/ अम्मी तेरे हाथ ना जले, चिमटा खरीद लाया हूँ।।
-यशवंत यदु
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? कविता का मतलब नहीं ,शब्दों की भरमार । कुछ तो उसका मर्म हो कुछ तो हो आधार।।
-डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंगÓ
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कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के संयोजक रामकुमार सोनी ने आमंत्रित अतिथियों और रचनाकारों के प्रति संकेत साहित्य समिति की ओर से आभार व्यक्त किया।
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