0 छत्तीसगढ़ में भी पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाए ; वीरेन्द्र नामदेव
रायपुर, 21 मार्च (आरएनएस)। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री और छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने मध्यप्रदेश शासन पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 में वित्त विभाग छत्तीसगढ़ शासन के संशोधन आदेश दिनांक 24 अगस्त 2006 को निरस्त करने और सहायता राशि में तत्काल बढ़ाने करने की मांग की है । उनका कहना है कि विगत लगभग बीस वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है ।उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध किया है कि वे इस विषय पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें और जल्द से जल्द पेंशनरों के हित में निर्णय लें।
श्री नामदेव ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के कर्मचारियों के लिए तो कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने हेतु घोषणा हो चुकी है, लेकिन पेंशनरों के लिए कुछ नहीं कहा गया है, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के साथ- साथ पेंशनरों को भी इस योजना में शामिल किया है । अन्य राज्यों में भी कैशलेश चिकित्सा का लाभ पेंशनर्स को दिया जा रहा है। इसलिए भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग की है।
श्री नामदेव छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश संयोजक भी हैं । उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि मध्यप्रदेश शासन में बनाए गए पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य में पेंशनरों को राज्य बनने के 6 साल बाद तक सहायता दी जाती रही, लेकिन बाद में अगस्त 2006 में वित्त विभाग ने सहायता राशि में संशोधन किया, जिसमें राज्य बाहर इलाज कराने पर यह राशि 20 हजार रूपए से बढ़ाकर 30 हजार रूपए और राज्य के भीतर इलाज के लिए 6 हजार रूपए को बढ़ाकर 10 हजार किया गया। यह संशोधित वृद्धि लगभग बीस वर्षों से जारी है, अब तक इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है। महँगाई के इस कठिन दौर में पेंशनरों के इलाज के लिए यह राशि ऊँट के मुँह में जीरा के समान है । लेकिन शासन के इस आदेश की जानकारी के अभाव में प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख पेंशनर्स और परिवार पेंशनरों में से एक हजार पेंशनर भी इसका कोई लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में की गई श्री नामदेव की इन मांगों का भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के पदाधिकारी तथा अन्य पदाधिकारी क्रमश: जे पी मिश्रा, अनिल गोल्हानी, प्रवीण कुमार त्रिवेदी ,बी एस दसमेर, आर जी बोहरे, ओ डी शर्मा , शैलेन्द्र कुमार सिन्हा,एम एन पाठक, आर के टंडन, अनिल पाठक, हरेंद्र चंद्राकर, लोचन पांडेय,आर के साहू ‘ एन के कनौजे, आर के दीक्षित आदि ने भी समर्थन किया है।
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