नई दिल्ली ,22 मार्च (आरएनएस)। अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर पाबंदी हटाने के ऐलान से वैश्विक तेल संकट कम करने में मदद मिल सकती है। भले ही यह सीमित वक्त के लिए हो, लेकिन मुश्किल हालात में इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों को कम करने में मदद मिलेगी। भारत को भी अपने ऊर्जा संकट से निपटने में इस फैसले कुछ राहत मिल सकती है।
इसकी एक वजह यह भी है कि भारत की तेल रिफाइनरियों के पास कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उच्च तकनीक व लॉजिस्टिक क्षमता है और वे काफी समय से रूसी तेल को प्रोसेस करने में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
भारत अभी ऊर्जा का 85 प्रतिशत विभिन्न देशों से आयात करता है। वर्ष 2018-19 में भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत होती थी। जब 2019 में अमेरिका ने ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए तो उसके बाद से भारत का आयात कम होता चला गया और अब मामूली व्यापार रह गया है। साल 2025 में ईरान से महज 0.44 बिलियन डॉलर का आयात किया गया। जबकि 1.24 बिलियन डॉलर का निर्यात किया गया
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