दुर्ग, 22 मार्च (आरएनएस)। मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए चल रहा करोड़ों का ऑनलाइन सट्टा कारोबार आखिरकार पुलिस के रडार में आ ही गया। दुर्ग के जामुल में किराए के मकान से संचालित इस हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 7 आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया—हर दिन लाखों का खेल, और पूरा नेटवर्क डिजिटल पर्दे के पीछे छिपा था। दुर्ग पुलिस ने जामुल थाना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित ऑनलाइन सट्टा गिरोह का पर्दाफाश किया है। सुंदर विहार कॉलोनी फेस-2, नालंदा स्कूल के पीछे स्थित एक किराए के मकान में यह अवैध कारोबार चल रहा था। पुख्ता सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने दबिश दी और मौके पर ही आरोपियों को सट्टा संचालित करते पकड़ लिया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ड्रैगन टाइगर, अंदर-बाहर, तीन पत्ती, टेनिस, फुटबॉल और रूलेट जैसे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा चला रहे थे।
इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों को जोड़ा जाता था, फिर उन्हें आईडी देकर मोबाइल और लैपटॉप से सट्टा खिलाया जाता था। पूरा नेटवर्क बेहद संगठित था और हर सदस्य की भूमिका तय थी। पुलिस ने मौके से 1 लाख रुपये नगद, 16 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 15 एटीएम कार्ड, 7 बैंक पासबुक, वाई-फाई उपकरण और लेन-देन से जुड़े रजिस्टर जब्त किए हैं। यह साफ संकेत है कि गिरोह तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर सट्टा संचालित कर रहा था। जांच में सामने आया कि हर दिन 3 से 7 लाख रुपये का लेन-देन हो रहा था और कुल कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका था। आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग सिम कार्ड और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, इस पूरे नेटवर्क को तकनीकी रूप से बाहरी लोगों द्वारा भी कंट्रोल किया जा रहा था, जिससे यह और भी खतरनाक बन गया था। गिरफ्तार आरोपियों में पोषण निषाद (26), योगेश कुमार विश्वकर्मा (22), गौरव तिवारी (26), संजय कुमार जायसवाल (26), चुनेश निषाद (20), विक्रम सिंह उर्फ विक्की (30) और उदल हमणे (19) शामिल हैं। सभी अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं और मिलकर इस अवैध कारोबार को चला रहे थे। इस मामले में थाना जामुल में अपराध क्रमांक 185/2026 के तहत धारा 318(4) बीएनएस और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 6, 7 और 8 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों की पूरी ट्रेल खंगालने में जुटी है।
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