रायपुर, 22 मार्च (आरएनएस)। बीमा पॉलिसी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह आखिरकार बेनकाब हो गया। रायपुर पुलिस ने इस हाईटेक फ्रॉड के फरार मास्टरमाइंड को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है—एक ऐसा नेटवर्क, जो फोन कॉल, फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों के जरिए लोगों की जिंदगीभर की जमा पूंजी साफ कर रहा था। रायपुर के मुजगहन इलाके से शुरू हुई एक शिकायत ने देशभर में फैले ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। ग्राम कांदुल निवासी परमजीत सिंह चड्डा को बीमा पॉलिसी मैच्योर होने का झांसा देकर 9 लाख 60 हजार रुपये की ठगी की गई थी। आरोपियों ने खुद को बैंक और बीमा अधिकारी बताकर इतनी सफाई से जाल बुना कि पीडि़त को लंबे समय तक शक ही नहीं हुआ। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पहले ही गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड जितेन्द्र कुमार उर्फ राजीव फरार चल रहा था, जो पर्दे के पीछे से पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहा था। एण्टी क्राइम और साइबर यूनिट के साथ मुजगहन पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार दबिश और तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। आखिरकार दिल्ली में छिपे मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है, जिसमें ठगी से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार मास्टरमाइंड का नाम जितेन्द्र कुमार उर्फ राजीव है, जिसकी उम्र 35 वर्ष है और वह वसुंधरा, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) का निवासी है। इससे पहले इस गिरोह के तीन अन्य सदस्य भी पकड़े जा चुके हैं, जिनमें अनिल कुमार (37 वर्ष), निवासी हयान एन्क्लेव, लोनी देहात, गाजियाबाद; अजय तिवारी (33 वर्ष), निवासी राहुल विहार, विजय नगर, गाजियाबाद; और रिंकू सिंह (42 वर्ष), निवासी शालिमार गार्डन, साहिबाबाद, गाजियाबाद शामिल हैं। ये सभी मिलकर संगठित तरीके से देशभर में ठगी को अंजाम दे रहे थे। जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी कॉल सेंटर के जरिए देशभर में लोगों को निशाना बनाता था। पहले बीमा पॉलिसी मैच्योर होने का लालच दिया जाता, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स और एनओसी के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती। भरोसा बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य संस्थाओं के कूटरचित दस्तावेज तक भेजे जाते थे। इस मामले में थाना मुजगहन में अपराध क्रमांक 24/2026 के तहत धारा 318(4) बीएनएस और 61ष्ठ आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क और ठगी के और मामलों की कडिय़ां जोड़ रही है। साथ ही यह घटना आम लोगों के लिए चेतावनी भी है—फोन पर मिलने वाले लालच भरे ऑफर अक्सर ठगी का जाल होते हैं, जिनसे बचना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
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