० बारसूर की ऐतिहासिक धरोहर और वन मंदिर के महत्व को जाना
बीजापुर, 23 मार्च (आरएनएस)। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत बीजापुर जिले के विकासखण्ड भैरमगढ़ के पीएमश्री रेसीडेंसियल पोर्टाकेबिन हाई स्कूल नेलसनार के विद्यार्थियों के लिए विगत दिवस एक प्रेरणादायक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण और विज्ञान को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ सुश्री नम्रता दुबे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला शिक्षा अधिकारी लखन लाल धनेलिया का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक नगर बारसूर (जिला दंतेवाड़ा) का भ्रमण किया। बारसूर को मंदिरों का शहर कहा जाता है, जहाँ 10वीं-11वीं शताब्दी में छिंदक नागवंशी शासकों की राजधानी हुआ करती थी। उस समय इसे चक्रकोट या भ्रमरकोट के नाम से जाना जाता था। यहाँ कभी लगभग 147 मंदिरों और तालाबों का समूह था, जो उस समय की समृद्ध संस्कृति और स्थापत्य कला का प्रमाण है। विद्यार्थियों ने बारसूर की प्रसिद्ध जुड़वा गणेश प्रतिमाओं को देखा, जो एक ही ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित विशाल और अनूठी मूर्तियाँ हैं। इसके साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक बत्तीसा मंदिर का अवलोकन किया, जिसमें 32 सुंदर पत्थर के खंभे हैं और जिन पर अद्भुत नक्काशी की गई है। बच्चों ने मामा-भांजा मंदिर की अनोखी वास्तुकला और उससे जुड़ी लोककथा के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इसके अतिरिक्त 11वीं शताब्दी के चंद्रादित्य मंदिर की प्राचीन संरचना और शिल्पकला को देखकर विद्यार्थियों ने उस समय की उन्नत कला और स्थापत्य परंपरा को समझा। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि बारसूर की मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला इतनी उत्कृष्ट है कि इसे दंतेवाड़ा का खजुराहो भी कहा जाता है। यहाँ की पत्थर की नक्काशी और मंदिरों की संरचना प्राचीन भारतीय कला की श्रेष्ठ परंपरा को दर्शाती है। बच्चों ने कृषि विज्ञान केन्द्र गीदम का भी अवलोकन किया, इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ हेमलता ठाकुर एवं डॉ ईशांत सुखदेवे ने बच्चों को मशरूम उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन, कुक्कुटपालन एवं मछलीपालन संबंधी समन्वित कृषि के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इसके बाद बच्चों ने जावंगा में दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास हेतु संचालित सक्षम संस्था तथा आस्था विद्या मंदिर का अवलोकन कर यहां की शैक्षणिक व्यवस्था की जानकारी ली। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने दंतेवाड़ा स्थित वन मंदिर का अवलोकन किया और इसके वन एवं जलवायु परिवर्तन के महत्व के बारे में भी जाना। माता दंतेश्वरी को बस्तर की आराध्य देवी माना जाता है और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान में उनका विशेष स्थान है। बस्तर की लोकपरंपराओं, विशेषकर बस्तर दशहरा और स्थानीय आस्थाओं में माता दंतेश्वरी की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखती है। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को पर्यावरण और विज्ञान के दृष्टिकोण से भी जानकारी दी गई। बारसूर के आसपास की हरियाली, प्राचीन तालाबों की संरचना और जल प्रबंधन प्रणाली को देखकर बच्चों ने यह समझा कि प्राचीन काल में भी लोग प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते थे। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ी। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार मरावी द्वारा विद्यार्थियों को स्थल पर जानकारी देकर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और पर्यावरण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को जाना और अपनी जिज्ञासा तथा समझ को और अधिक विकसित किया। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ, जिसने उन्हें अपनी ऐतिहासिक धरोहर, संस्कृति और पर्यावरण के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।
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