चुनाव आचार संहिता लगते ही आयोग की ताबड़तोड़ कार्रवाई
जगदीश यादव
कोलकाता 23 March, (Rns) । बंगाल के वातावरण में चुनावी सरगर्मी देखी जा रही है। चुनाव प्रचार जम गया है और नेतागण धूप में भी डगर-डगर से लेकर घर-घर की खाक छान रहें है। ऐसे में चुनाव आयोग की भी इस राज्य में अभूतपूर्व सक्रियता देखी जा रही है। दिन हो या रात सुबह हो या तड़के, चुनाव आयोग अपने कार्य में वक्त को नहीं देख रही है। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले और इस खबर के लिखे जाने तक 180 करोड़ से ज्यादा नकदी व शराब-ड्रग्स जब्त चुकी थी। साफ कहे तो बंगाल के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी) को सख्ती से लागू किया जा रहा है। चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी है। मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि सभी जिलों में बड़े पैमाने पर पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वाले सामान को हटा दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एमसीसी लागू होने के बाद से कई प्रवर्तन एजेंसियां नकदी, शराब और नशीले पदार्थों की आवाजाही पर व्यापक निगरानी रख रही हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, 22 मार्च तक कुल जब्ती लगभग 181.31 करोड़ तक पहुंच गई है। आयोग के अनुसार कैश और दूसरे सामान के गैर-कानूनी आवाजाही को रोकने के लिए 1,800 से ज्यादा फ्लाइंग स्क्वाड टीम (एफएसटी) और 2,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीम (एसएसटी) तैनात की गई हैं। इन टीमों को शिकायतों पर कार्रवाई करने, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करने और मतदाताओं को प्रभावित कर सकने वाले धन और अन्य सामग्रियों के अवैध परिवहन को रोकने का कार्य सौंपा गया है। जारी बयान में कहा गया है कि पुलिस ने क्रिमिनल इंटिमिडेशन और वोटर को डराने-धमकाने से जुड़े मामलों में भी गिरफ्तारियां की हैं, जबकि कड़ी निगरानी के तहत बिना लाइसेंस वाले हथियार और विस्फोटक जब्त किए गए हैं। बहरहाल जो भी हो बंगाल में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने 50 से अधिक टॉप अधिकारियों का तबादला कर दिया है। हालांकि चुनाव आयोग के इस कदम की राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कड़ी आलोचना की है और इसे राज्य में अघोषित राष्ट्रपति शासन करार दिया है। मामले पर एक अधिकारी ने कहा कि, जिस तरह से चुनाव आयोग सक्रिय है वह अपने आप में उल्लेखनीय है। बंगाल के इतिहास में इस आयोग की सक्रियता इस तरह से नहीं देखे जाने की बात कही जा रही है
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