जल्द ही यात्री ट्रेन के रवाना होने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे
रेलवे का लक्ष्य रिफंड के ज़रिए आखिरी समय में होने वाली अंदाज़े वाली बुकिंग को रोकना और असली यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के टिकट सुनिश्चित करना है
ऑटोमोबाइल उद्योग अब नमक और ऑटोमोबाइल ले जाने के लिए विशेष कंटेनर डिज़ाइन कर सकता है
रेलवे ने नमक परिवहन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए, ऊपर से लोड होने और बगल से खाली होने की व्यवस्था वाले, जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील के कंटेनर पेश किए
परियोजना की गुणवत्ता, जवाबदेही और उन्हें समय पर पूरा करने की प्रक्रिया को मज़बूत करने के लिए निर्माण नियमों में सात मुख्य बदलावों की घोषणा की गई
नई दिल्ली ,24 मार्च,(आरएनएस)। रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज घोषणा की कि 2026 के दौरान सुधार करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप, पाँच नए सुधारों को स्वीकृति दी गई है। इन नए सुधारों की मंज़ूरी के साथ, वर्ष 2026 के लिए सुधारों की कुल संख्या नौ हो गई है।
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पहल के तहत, चार सुधारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी और अब पाँच नए सुधार पेश किए जा रहे हैं। इन पाँच नए सुधारों में से दो माल ढुलाई से, एक निर्माण से और दो यात्रियों की सुविधा से संबंधित हैं।
नमक के परिवहन में सुधार
पांचवां सुधार नमक के परिवहन पर केंद्रित है। इसके बारे में श्री वैष्णव ने कहा कि भारत दुनिया में नमक के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। नमक का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान हैं। भारत में सालाना उत्पादित होने वाले लगभग 35 मिलियन टन नमक में से, लगभग 9.2 मिलियन टन प्रति वर्ष रेल द्वारा पहुँचाया जाता है, जो महत्वपूर्ण और ऐसा अवसर है जिसका अब तक उपयोग नहीं किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नमक के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी उसके उपयोग के अनुसार अलग-अलग होती है – औद्योगिक नमक के लिए यह लगभग 25 प्रतिशत है, और मानव उपभोग के लिए इस्तेमाल होने वाले नमक के लिए यह लगभग 65 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा पहुँचाए जाने वाले कुल नमक का 62 प्रतिशत हिस्सा 1,000 से 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जिससे यह खंड रेल परिवहन के लिए बेहद उपयुक्त बन जाता है।
श्री वैष्णव ने कहा कि नमक उत्पादकों और ट्रांसपोर्टरों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया ताकि इस क्षेत्र की चुनौतियों को समझा जा सके। इस अध्ययन में कई प्रमुख समस्याओं की पहचान की गई, जिनमें वैगनों का अनुपयुक्त डिज़ाइन, नमक के कारण वैगनों में जंग लगना, तिरपाल से ढके होने के बावजूद खुले वैगनों में पानी का रिसाव होना, और सामान की कई बार लोडिंग-अनलोडिंग (हैंडलिंग) के कारण लागत में वृद्धि और नुकसान होना शामिल हैं।
इन समस्याओं को हल करने के लिए अब स्टेनलेस स्टील से बना, ऊपर से लोड होने वाला और बगल से खाली होने वाला कंटेनर सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। यह कंटेनर जंग से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है, और इसमें ऊपर से लोड करने के लिए फ्लैप तथा बगल से खाली करने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र लगा है, जिससे गंतव्य स्थान पर ट्रकों में नमक को आसानी से अनलोड किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नमक उत्पादन वाली जगहों पर सीधे लोडिंग के लिए कंटेनर रखे जा सकते हैं। फिर इन कंटेनरों को उठाकर कंटेनर ट्रेनों में लोड किया जा सकता है। मंजि़ल पर पहुँचने पर, कंटेनरों को उतारकर गोदामों या वेयरहाउस में रखा जा सकता है, और ज़रूरत के हिसाब से उन्हें खाली किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम ज़्यादा लचीलापन देता है, बिना किसी रुकावट के कई तरीकों से सामान की आवाजाही में मदद करता है, सामान को संभालने में होने वाले नुकसान को कम करता है, और इंडस्ट्री ने इसे काफी पसंद किया है।
ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट में सुधार
भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार प्रति वर्ष लगभग 31 मिलियन यूनिट बनाता है, जिसमें से यात्री वाहनों की संख्या लगभग 5 मिलियन यूनिट होती है। यात्री वाहनों के ट्रांसपोर्ट में रेल का हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत है, जिससे पता चलता है कि ऑटोमोबाइल की आवाजाही का बड़ा हिस्सा अब भी सड़क मार्ग से ही होता है।
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