महासमुंद 24 मार्च 2026(आरएनएस) महासमुंद जिले की सागुनढाप पंचायत में वित्तीय गड़बड़ी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 15वें वित्त आयोग की राशि बिना पूरे दस्तावेजों के ही निकाल ली गई, वो भी कोरे बिलों के सहारे। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सागुनढाप में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत को 15वें वित्त आयोग के तहत मिली राशि का दुरुपयोग किया गया है और नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार पंचायत में बिना पूरी जानकारी के कोरे बिल-बाउचरों के आधार पर राशि आहरित की गई। दस्तावेजों में सामग्री, मात्रा और दर जैसी जरूरी जानकारी खाली छोड़ी गई, जबकि भुगतान की रकम स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसे वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में 10 जून 2024 का एक बिल सामने आया है, जिसमें 1.50 लाख रुपए की राशि दर्शाई गई है, लेकिन बिल में कोई ठोस विवरण नहीं है। इसके बावजूद संबंधित फर्म को भुगतान कर दिया गया, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है।
मामले में पंचायत सचिव सुभाषचंद्र साहू ने सफाई देते हुए कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत जनपद निधि से कचरा शेड निर्माण जैसे कार्यों के लिए करीब 3 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। उन्होंने दावा किया कि बिल में “प्रिंट मिस्टेक” के कारण जानकारी दर्ज नहीं हो पाई। वहीं ठेकेदार मोहितराम पटेल ने कहा कि उसने कोरा बिल दिया था, लेकिन इसे RTI में सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था।
इस बीच करारोपण अधिकारी सुशील चौधरी ने भी बताया कि जब-जब पंचायत सचिव से दस्तावेज मांगे गए, तब वे अधूरे होने का हवाला देकर टालते रहे। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि कहीं न कहीं नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
तीनों पक्षों के अलग-अलग बयानों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। बिना वैध और पूर्ण दस्तावेजों के भुगतान करना न केवल वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि इसे भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी माना जा सकता है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो पंचायत स्तर पर पारदर्शिता खत्म हो जाएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। अब नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है, जो इस पूरे मामले में सच्चाई सामने ला सकती है।

