बिलासपुर 24 मार्च (आरएनएस) साइबर ठगी के बढ़ते खतरे के बीच अब पुलिस ने भी डिजिटल मोर्चे पर आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है। बिलासपुर रेंज में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों को ऐसे आधुनिक टूल्स, तकनीक और नई SOP से लैस किया गया, जिससे न सिर्फ ठगी के पैसों को तुरंत होल्ड कर वापस कराया जा सके, बल्कि अपराधियों तक तेजी से पहुंच बनाना भी संभव होगा।

बिलासपुर के चेतना हॉल में 24 मार्च को पुलिस महानिरीक्षक श्रीराम गोपाल गर्ग के नेतृत्व में रेंज स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बिलासपुर, जांजगीर-चांपा सहित पूरे रेंज के करीब 100 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय की मौजूदगी ने इसे और महत्वपूर्ण बना दिया।कार्यशाला का फोकस साफ था—साइबर अपराधों की रोकथाम और विवेचना की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देना। अधिकारियों को गृह मंत्रालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी नई SOP की बारीकियां समझाई गईं। खास तौर पर साइबर ठगी में गए पैसों को होल्ड कर पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।तकनीकी सत्रों में पुलिस को आधुनिक जांच के हथियारों से परिचित कराया गया। नेटग्रिड के उपयोग से लेकर सीडीआर एनालिसिस, सी-ट्रेस और “त्रिनयन” जैसे एडवांस सिस्टम के जरिए अपराधियों की लोकेशन ट्रैक करने की तकनीक समझाई गई। इतना ही नहीं, इंजन और चेसिस नंबर से चोरी के वाहनों की पहचान करने की प्रक्रिया भी बताई गई, जिससे फील्ड में जांच और तेज हो सके।दुर्ग से आए साइबर एक्सपर्ट आरिफ खान ने लाइव डेमो के जरिए साइबर फ्रॉड के तरीके उजागर किए। डार्क नेट की दुनिया से लेकर डिजिटल सबूत जुटाने तक की तकनीकी बारीकियां साझा की गईं। इससे पुलिसकर्मियों को अपराध के नए पैटर्न समझने में मदद मिली।

आईजी श्रीराम गोपाल गर्ग ने साफ कहा कि तकनीक ही अब असली ताकत है। जो पुलिस इसमें दक्ष होगी, वही अपराधियों से एक कदम आगे रहेगी। उन्होंने प्रतिभागियों की समस्याएं सुनीं और विवेचना के दौरान आने वाली चुनौतियों के समाधान भी मौके पर ही दिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में साइबर पुलिसिंग को और मजबूत किया जाएगा।कार्यशाला का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक ऐसी रणनीति तैयार करना था जिससे आम जनता को साइबर ठगी से राहत मिल सके। पुलिस अब पारंपरिक जांच के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय कर तेजी से कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।अंत में प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया और अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस पहल से साइबर अपराधों की जांच में बड़ा बदलाव आएगा।


