आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद डॉ. मल्लप्पा को मिली राहत
केरल, 25 मार्च (आरएनएस)। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद, जिसे 15 मार्च को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया था, राज्य में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के साथ ही वित्तीय लेन-देन पर निगरानी और सख्त कर दी गई है। इसी क्रम में केरल से एक मामला सामने आया है, जहां आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद किए गए एक बड़े नकद निकासी लेन-देन ने चुनाव अधिकारियों और आयकर विभाग का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 16 मार्च को, आचार संहिता लागू होने के अगले ही दिन, कृष्णागिरी जिले के निवासी डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपनी पत्नी रागिन मारिया के एक्सिस बैंक खाते से 12 लाख रुपये की नकद निकासी की। इसी दिन लगभग 7.50 लाख रुपये मूल्य का सोना भी खरीदा गया। इन लेन-देन को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने संदिग्ध मानते हुए जांच के दायरे में लिया, क्योंकि चुनावी अवधि के दौरान नकदी के असामान्य प्रवाह पर विशेष नजर रखी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार के चुनावी प्रभाव को रोका जा सके। इसके बाद आयकर विभाग ने डॉ. मल्लप्पा से संपर्क कर निकासी पर्ची और खरीद के बिल सहित संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। मौजूदा नियमों के अनुसार, आचार संहिता के दौरान व्यक्ति अपने बैंक खाते से किसी भी राशि की निकासी कर सकता है, लेकिन 10 लाख रुपये या उससे अधिक की निकासी की सूचना स्वतः आयकर विभाग को दी जाती है। वहीं, 50,000 रुपये से अधिक नकद राशि बिना वैध दस्तावेज के साथ ले जाने पर चुनाव निगरानी दल द्वारा उसे जब्त भी किया जा सकता है। डॉ. मल्लप्पा, जो एक प्रतिष्ठित सोशल प्रेन्योर के रूप में जाने जाते हैं, ने स्पष्ट किया कि यह निकासी और खरीदारी उनके परिवार में होने वाले बहन के विवाह की तैयारियों के लिए की गई थी। आवश्यक दस्तावेज और बिल प्रस्तुत करने के बाद मामले का समाधान हो गया और आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में डॉ. मल्लप्पा ने कहा कि यह लेन-देन पूरी तरह पारिवारिक जरूरत के तहत किया गया था और उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वे पहले भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सहयोग करते रहे हैं और आगे भी सभी नियमों का पालन करते रहेंगे। डॉ. मल्लप्पा एक जिम्मेदार नागरिक और नियमित करदाता हैं, जिनके खिलाफ पहले किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का कोई रिकॉर्ड नहीं रहा है। उनके द्वारा समय पर और पारदर्शी तरीके से दस्तावेज उपलब्ध कराने के चलते जांच प्रक्रिया बिना किसी विलंब के पूरी हो सकी। यह घटना दर्शाती है कि आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग और आयकर विभाग किस तरह से कड़ी निगरानी बनाए रखते हैं, जहां सामान्य और वैध वित्तीय गतिविधियां भी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जांच के दायरे में लाई जाती हैं।
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