अल्मोड़ा,25 मार्च (आरएनएस)। पेंशनर्स के वर्गीकरण से जुड़े अधिनियम को वापस लेने की मांग को लेकर गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, अल्मोड़ा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन भेजा। संगठन के जिला अध्यक्ष हेमचन्द जोशी के नेतृत्व में बुधवार को यह ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा संसद में 25 मार्च 2025 को पारित पेंशनर्स वर्गीकरण अधिनियम 2025 एक वर्ष से प्रभावी है, जिसके तहत पेंशनर्स के बीच वर्गीकरण कर अंतर बनाए रखने का प्रावधान किया गया है। संगठन का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण किसी भी केंद्रीय या अन्य वेतन आयोग के कार्यकाल से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स को संबंधित वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं मिल पाएगा, जिससे वे पेंशन वृद्धि से वंचित रह जाएंगे। ज्ञापन में डी एस नाकारा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने अपने निर्णय में पेंशन को सामाजिक कल्याण का उपाय बताते हुए इसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का माध्यम माना है। निर्णय में यह भी कहा गया है कि पेंशन योजना का उद्देश्य पेंशनर्स को सम्मानजनक और अभावमुक्त जीवन उपलब्ध कराना है। संगठन ने आशंका जताई है कि वर्तमान अधिनियम के प्रावधानों से एक जनवरी से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनर्स को अपूर्णीय क्षति हो सकती है। इसी के विरोध में आल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन के आह्वान पर बुधवार को विरोध दिवस मनाया गया। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने केंद्र सरकार से अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस दौरान हेम चन्द्र जोशी, चन्द्र मणी भट्ट, आनन्द सिंह बगड़वाल, डा. गोकुल सिंह रावत, गिरीश चन्द्र जोशी, सी एस बनकोटी सहित अन्य पेंशनर्स उपस्थित रहे।
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