लखनऊ 25 मार्च ( आरएनएस ) उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के तत्वावधान में गिग एवं प्लेटफार्म कर्मियों की चुनौतियों, कल्याण तथा सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकताओं के चिन्हांकन हेतु लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल मेरियट में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग डॉ. शन्मुगा सुन्दरम् ने की, जिसमें प्लेटफार्म कर्मियों, श्रमिक संगठनों, सेवा प्रदाता कंपनियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यशाला के प्रथम सत्र में श्रमिक प्रतिनिधियों एवं सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ अलग-अलग संवाद स्थापित कर गिग एवं प्लेटफार्म कर्मियों के समक्ष आने वाली समस्याओं, कार्यदशाओं, सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। उप श्रमायुक्त द्वारा श्रम संहिताओं के अंतर्गत गिग एवं प्लेटफार्म कर्मियों के लिए उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों की जानकारी दी गई।निदेशक सेवायोजन नेहा प्रकाश ने गिग एवं प्लेटफार्म कर्मियों की परिभाषा स्पष्ट करते हुए सेवामित्र पोर्टल पर उपलब्ध 28 सेवाओं की जानकारी दी तथा कर्मियों को इससे जुडऩे के लिए प्रेरित किया। संयुक्त सचिव एवं अन्य अधिकारियों ने गिग अर्थव्यवस्था के महत्व और वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख सचिव डॉ. शन्मुगा सुन्दरम् ने कहा कि श्रम संहिताओं में पहली बार गिग एवं प्लेटफार्म कर्मियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की पहल एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिग कर्मियों की भागीदारी अत्यंत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने सभी कर्मियों से पंजीकरण कराने तथा प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से जुडऩे का आह्वान किया।
कार्यशाला में विभिन्न संगठनों एवं कर्मियों द्वारा उपभोक्ता पहचान सत्यापन, चिकित्सीय दावा, दुर्घटना बीमा तथा पहचान पत्र निरस्त करने से पूर्व कर्मी का पक्ष सुनने जैसी प्रमुख मांगें रखी गईं। सेवा प्रदाता कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए पंजीकरण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।द्वितीय सत्र में सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें सेवामित्र पोर्टल की सुविधाओं, श्रम संहिताओं के प्रावधानों तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, रियायती ऋण तथा विश्राम स्थल जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई।प्रमुख सचिव ने गिग अर्थव्यवस्था की तेजी से बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में अनुमानित 14 से 15 लाख गिग कर्मियों के मुकाबले अभी केवल लगभग 1.34 लाख का ही पंजीकरण हुआ है। उन्होंने इस दिशा में तेजी लाने पर जोर देते हुए कर्मियों और सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया, जिससे समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जा सके।कार्यक्रम के अंत में अपर श्रमायुक्त द्वारा सभी सुझावों को भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों में समाहित करने का आश्वासन दिया गया तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।
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