जगदलपुर, ,25 मार्च,(आरएनएस)। बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवनÓ पहल के अंतर्गत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (ष्ठ्यसर््ंष्ट) से जुड़े कुल 18 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। इन कैडरों में 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के वरिष्ठ और प्रभावशाली सदस्य एसजेडसीएम पापाराव सहित डीवीसीएम अनिल ताती और डीवीसीएम प्रकाश मड़वी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर करीब 87 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह कार्यक्रम बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग में आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठ नागरिकों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिजन उपस्थित रहे। इस दौरान सभी कैडरों ने हिंसा त्यागकर शांति, विकास और सामान्य जीवन अपनाने का संकल्प लिया।
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष 08 एके-47 रायफल, 01 एसएलआर, 01 इंसास, 04 .303 रायफल, 01 9 एमएम पिस्टल, 02 सिंगल शॉट हथियार और 01 बीजीएल लांचर सहित कुल 18 हथियार तथा लगभग 12 लाख रुपये नकद जमा कराए। यह बरामदगी माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता पर बड़ा आघात मानी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पापाराव लंबे समय से नक्सल संगठन में सक्रिय रहा और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में उसकी भूमिका रही है। संगठन में वह रणनीतिक स्तर पर काम करता था और उसके आत्मसमर्पण को नक्सली नेटवर्क के कमजोर पडऩे का संकेत माना जा रहा है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों, विकास कार्यों की पहुंच और प्रभावी पुनर्वास नीति के चलते नक्सलियों का मनोबल टूट रहा है और वे बड़ी संख्या में मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 25 मार्च 2026 तक बस्तर संभाग में कुल 2756 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि ‘पुनर्वास से पुनर्जीवनÓ नीति का असर तेजी से जमीन पर दिखाई दे रहा है।
राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
अधिकारियों का कहना है कि दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सल संगठन अब कमजोर पड़ चुका है और यह सरेंडर अभियान इस बात का संकेत है कि वामपंथी उग्रवाद अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है। सुरक्षा बलों ने शेष माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा में लौटें।
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