नई दिल्ली ,26 मार्च,। लगातार 9 दिनों तक औंधे मुंह गिरने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में अचानक जबरदस्त तेजी लौट आई है। एमसीएक्स (रूष्टङ्ग) पर चांदी की कीमत ने निवेशकों को हैरान करते हुए लगभग 5.5 प्रतिशत यानी 12,000 रुपये से अधिक की छलांग लगाई है और यह 2,36,137 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, एमसीएक्स पर ही सोने की कीमत भी 4 प्रतिशत या 5,500 रुपये से ज्यादा की मजबूती के साथ 1,44,434 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। विदेशी बाजारों में भी पीली धातु के भाव 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए हैं।
युद्ध रुकने की उम्मीद और ट्रंप के इशारे ने किया कमाल
सोने-चांदी की कीमतों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरें सबसे बड़ी वजह मानी जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मध्य पूर्व में चल रहे विनाशकारी युद्ध को खत्म करने के लिए अब कूटनीतिक रास्ता तलाशा जा रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो जल्द ही दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता हो सकती है। हालांकि, इस पर अभी ईरान की ओर से अंतिम प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन शांति की इस उम्मीद ने सर्राफा बाजार में गजब का उत्साह भर दिया है।
डॉलर और कच्चे तेल की कमजोरी से मिला डबल सपोर्ट
वैश्विक बाजार की बात करें तो रॉयटर्स के मुताबिक, नरम डॉलर और कच्चे तेल में आई कमजोरी के कारण हाजिर सोना 2.1 प्रतिशत बढ़कर 4,568.29 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। वहीं, अप्रैल डिलीवरी वाले अमेरिकी सोना वायदा में 3.8 प्रतिशत का उछाल आया और यह 4,569.40 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। हाजिर चांदी भी 3.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73.94 डॉलर प्रति औंस हो गई है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, डॉलर इंडेक्स के करीब 0.2 प्रतिशत गिरने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना सस्ता और अधिक आकर्षक हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोना शेयर बाजार के साथ कदम मिला रहा था, जबकि कच्चे तेल के साथ इसका ट्रेंड बिल्कुल उल्टा दिखा है।
बाजार में अभी भी मंडरा रहा है खतरे का बड़ा साया
भले ही सोने-चांदी ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन जानकारों का मानना है कि बाजार में अनिश्चितता और खतरे के बादल अभी पूरी तरह छंटे नहीं हैं। ईरान ने अभी भी होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है और दूसरी तरफ इजरायल के हमले लगातार जारी हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने भी करीब 2,000 अतिरिक्त सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने का फैसला किया है। इसके अलावा, ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढऩे का खतरा है, जिससे ब्याज दरें ऊपर ही रह सकती हैं। इसी महीने युद्ध के कारण कच्चा तेल 120 डॉलर तक पहुंच गया था, जिसने ब्याज दरों की चिंता बढ़ा दी थी और सोने में 15 प्रतिशत तक की भारी गिरावट ला दी थी।
केंद्रीय बैंकों की बिकवाली और आगे का ट्रेंड
इस पूरी उथल-पुथल के बीच यह भी खबरें आ रही हैं कि कुछ देशों के केंद्रीय बैंक अपनी घरेलू मुद्रा को सहारा देने के लिए अपना सोना बेच रहे हैं। इसमें विशेष रूप से तुर्की का नाम सामने आ रहा है, जिसका केंद्रीय बैंक अपने विशाल सोने के भंडार का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की चाल पूरी तरह से मध्य पूर्व के युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों के रुख पर निर्भर करेगी। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो बाजार में और सुधार दिखेगा, लेकिन अनिश्चितता बनी रही तो उतार-चढ़ाव का यह दौर लंबा खिंच सकता है।
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