लखनऊ, 30 मार्च (आरएनएस ) । महाभारत काल की स्मृतियों को संजोए उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक काम्पिल्य (कंपिल) अब विश्व स्तरीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार ने महाभारत सर्किट के अंतर्गत फर्रुखाबाद जिले के इस पौराणिक स्थल के समेकित विकास के लिए 4.70 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी देते हुए प्रथम किश्त के रूप में 1.40 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि द्रौपदीजी की जन्मस्थली सहित अनेक सांस्कृतिक धरोहरों की धरती काम्पिल्य को संवारने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा काम्पिल्य में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। महाभारत सर्किट के अंतर्गत द्वापर युगीन इस प्राचीन भूमि को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके। आगंतुकों को तकनीक के माध्यम से उस कालखंड के इतिहास और घटनाओं से अवगत कराने के लिए इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन की व्यवस्था की जाएगी। वर्ष 2025 में फर्रुखाबाद जनपद में 21.67 लाख पर्यटकों के आगमन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या भी उल्लेखनीय रही है, जिससे इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता स्पष्ट होती है।महाभारत सर्किट के अंतर्गत काम्पिल्य में महाभारत से जुड़े प्रमुख प्रसंगों को सजीव रूप देने की योजना तैयार की गई है। करीब 2.37 करोड़ रुपए की लागत से चार इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक तकनीकी माध्यमों के जरिए द्रौपदी के जन्म, द्रौपदी और श्रीकृष्ण की मित्रता, द्रौपदी के स्वयंवर तथा कपिल मुनि के आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इससे आगंतुकों को महाभारत कालीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का एक नया और प्रभावी अनुभव मिलेगा।पर्यटन विकास योजना के तहत काम्पिल्य स्थित प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर को भी भव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत लगभग 30 लाख रुपए से अधिक की लागत से पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित एक आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न द्वारा यहां शिवलिंग की स्थापना की गई थी, जिसके दर्शन के लिए विशेषकर सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। साथ ही पर्यटकों को स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी देने के लिए भव्य स्टोन स्टोरी बोर्ड इंटरप्रिटेशन पैनल भी लगाए जाएंगे, जिससे उनकी जानकारी और अनुभव दोनों समृद्ध होंगे।काम्पिल्य में पर्यटकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लगभग 55 लाख रुपए की लागत से आधुनिक टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है। इस केंद्र में स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया तथा प्रशासनिक कार्यालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि महाभारत कालीन काम्पिल्य, जो प्राचीन समय में पांचाल की राजधानी रहा, आज भी अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के कारण विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि यहीं द्रौपदी का जन्म और स्वयंवर हुआ था। प्रदेश को 12 विशिष्ट पर्यटन सर्किटों में विकसित करने की योजना के अंतर्गत रामायण और इको सर्किट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, वहीं महाभारत सर्किट का विकास भगवान कृष्ण के दुनियाभर में फैले अनुयायियों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि काम्पिल्य जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है, जबकि निकट स्थित संकिसा स्थल भगवान बुद्ध से जुड़ी पवित्र स्थली के रूप में विख्यात है। प्रदेश सरकार काम्पिल्य के सर्वांगीण विकास के माध्यम से उसके प्राचीन गौरव को पुनस्र्थापित करने और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
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