लखनऊ 30 मार्च (आरएनएस)। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दृष्टिबाधिता विभाग द्वारा दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए मनोसामाजिक सहयोग प्रणाली: अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक विद्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें अभिभावकों, शिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम का शुभारंभ दृष्टिबाधिता विभाग की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विभागाध्यक्ष आद्या शक्ति राय ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए मनोसामाजिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों की संयुक्त भूमिका ही विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होती है।कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अमिता दुबे रहीं, जो नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की उत्तर प्रदेश शाखा से जुड़ी हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अभिभावकों का सकारात्मक दृष्टिकोण दृष्टिबाधित बच्चों के भविष्य को नई दिशा देता है। उन्होंने यह भी बताया कि उचित सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन से दृष्टिबाधित विद्यार्थी समाज में प्रेरणादायक उदाहरण बन सकते हैं।मुख्य अतिथि प्रो. वी.के. सिंह ने समावेशी शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि परिवार और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। विद्यालय के प्रधानाचार्य ओमकार नाथ शुक्ला ने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।कार्यक्रम में दिनेश कुमार एवं सुधा राव सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। इस कार्यशाला में लगभग 55 अभिभावकों एवं शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।कार्यक्रम के अंत में आशीष कुमार गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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