कांकेर 31 मार्च (आरएनएस) बस्तर के घने जंगलों में हिंसा की राह पर चल रहे माओवादी अब तेजी से हथियार छोड़ रहे हैं और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण की लहर ने संगठन की जड़ों को हिलाना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में 31 मार्च 2026 को कांकेर जिले में दो और सक्रिय माओवादी कैडर—PPCM शंकर और PM हिडमा डोडी—ने हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, खास बात यह रही कि दोनों कैडरों ने एक AK-47 राइफल के साथ सरेंडर किया, जो माओवादी ताकत का प्रतीक मानी जाती है। इससे पहले बीते पांच दिनों में ही 9 माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़ चुके थे, और अब इन दो नए सरेंडर के साथ यह आंकड़ा 11 पहुंच गया है, जो बस्तर रेंज में सुरक्षा बलों और प्रशासन की रणनीति की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के अनुसार, इन कैडरों ने सरकार की पुनर्वास नीति और शांतिपूर्ण जीवन की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है, वहीं आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली अहम जानकारियों के आधार पर पुलिस अब इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी नेटवर्क तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है और उन्हें भी मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टलिंगम ने खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए पिछले तीन दिनों में सामने आए सभी 11 माओवादी कैडरों के फैसले का स्वागत किया और बाकी बचे माओवादियों को सख्त संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए अब उनके पास बहुत कम समय बचा है, ऐसे में यह अवसर उनके लिए जीवन बदलने का आखिरी मौका साबित हो सकता है। 25 मार्च से 31 मार्च के बीच लगातार हो रहे इन आत्मसमर्पणों ने साफ संकेत दे दिया है कि जंगलों में अब बंदूक की गूंज कमजोर पड़ रही है और विकास व विश्वास की नीति असर दिखा रही है, आने वाले समय में इन सभी सरेंडर किए गए माओवादी कैडरों का सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा में पुनः एकीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक आयोजन भी किया जाएगा। बस्तर के जंगल अब एक नई कहानी लिख रहे हैं—जहां गोलियों की जगह अब भरोसे की आवाज गूंजने लगी है।
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