सारंगढ़ बिलाईगढ़ 17 मई 2026 (आरएनएस) पारंपरिक बेलमेटल कला से अपनी अलग पहचान बना चुके बैगीनडीह गांव के शिल्पकारों के लिए अब विकास, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने शिल्पग्राम बैगीनडीह का आकस्मिक निरीक्षण कर न केवल स्थानीय कला और कारीगरों के कौशल की सराहना की, बल्कि शिल्पकार परिवारों को आवास, रोजगार, आर्थिक सहायता और महिला सशक्तिकरण से जोड़ने के महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने महिला और पुरुष कारीगरों द्वारा तैयार की जा रही झारा शिल्प कला, बेलमेटल की आकर्षक मूर्तियों और हस्तनिर्मित सजावटी उत्पादों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक कला केवल संस्कृति की पहचान नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम भी है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र शिल्पकारों को प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय योजना का लाभ प्राथमिकता से दिया जाए। महिला शिल्पकारों को बिहान योजना से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया। जिला अंत्यावसायी विकास निगम के अधिकारी मनोज कुमार भगत को रोजगारमूलक ऋण उपलब्ध कराने और 10 हजार रुपये अनुदान देने के निर्देश भी मौके पर दिए गए। इस दौरान सत्ताधारी दल के सदस्य टीकाराम पटेल, सीताराम पटेल, जनपद पंचायत सारंगढ़ के राधेश्याम नायक, जिला पंचायत अधिकारी संजू पटेल, बिहान स्व सहायता समूह की महिलाएं तथा संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। बैगीनडीह को देश के प्रमुख शिल्पग्राम के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से जारी है और इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड रायपुर द्वारा 3 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। इस राशि में 2 करोड़ 25 लाख रुपये की आधुनिक मशीनों की खरीदी की जाएगी, जबकि 50 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक शिल्प वर्कशॉप भवन और दुकान का निर्माण होगा। भूमि चयन और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। भवन तैयार होने के बाद शिल्पकार एक ही परिसर में मूर्तियां और हस्तशिल्प सामग्री तैयार करेंगे तथा दुकान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर में बिक्री कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि बैगीनडीह की शिल्पकार हीराबाई झरेखा को दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जबकि मिनकेतन को भी राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हुआ है। बहरहाल, प्रशासन की यह पहल केवल विकास योजना नहीं, बल्कि गांव की परंपरा, कला और मेहनतकश हाथों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।


