रायपुर,29 मार्च (आरएनएस)। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी. एच. सुरेश द्वारा आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग को विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल 8 सीपीसी डॉट जीओवी डॉट इन (8ष्श्चष्.द्दश1.द्बठ्ठ) और माई जीओवी )रू4त्रश1 पोर्टल के माध्यम से प्रेषित किए गए हैं। अन्य पेंशनर्स भी व्यक्तिगत रूप से अथवा सामूहिक रूप से आयोग को इन पोर्टल पर अपने सुझाव ऑन लाइन भेज सकते हैं । इस संबंध में महासंघ के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आज यहाँ प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि आयोग द्वारा देशभर के समाचार पत्रों में अधिसूचना प्रकाशित कर कर्मचारियों, पेंशनरों एवं सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। ये सुझाव केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जा रहे हैं । उन्होंने बताया कि आयोग ने सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की है, जिससे पूर्व सभी संबंधित व्यक्ति अपने सुझाव पोर्टल पर दर्ज करा सकते है।उन्होंने आगे बताया कि महासंघ की ओर से फिटमेंट फैक्टर 4 से 5 के बीच निर्धारित करने, न्यूनतम पेंशन को न्यूनतम वेतन के 50 प्रतिशत से कम न रखने, 100 प्रतिशत महंगाई राहत सुनिश्चित करने, पूर्व एवं वर्तमान पेंशनरों के बीच पूर्ण समानता (पैरिटी) स्थापित करने तथा वन रैंक वन पेंशन – सिविल लागू करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव आयोग को भेजे गए हैं।इसके साथ ही पेंशनरों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, आयु के आधार पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि तथा एनपीएस की समीक्षा कर न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।प्रांताध्यक्ष श्री नामदेव ने प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों एवं पेंशनरों से अपील की है कि वे भी व्यक्तिगत रूप से आयोग के पोर्टल अपने सुझाव अवश्य भेजें, ताकि पेंशनरों की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त रूप से पहुंच सके।भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश से जुड़े पदाधिकारी क्रमश: जे.पी. मिश्रा, अनिल गोल्हानी, टी.पी.सिंह, बी.एस.दसमेर, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, एम.एन.पाठक,आर. जी.बोहरे, ओ.डी.शर्मा,अनिल पाठक शैलेन्द्र सिन्हा, आर.के.दीक्षित, आर.के.टंडन, नरसिंग राम, एम.आर. वर्मा, अनिल तिवारी, कौशलेंद्र मिश्रा, टी.एल.चंद्राकर, सोमेश्वर प्रसाद तिवारी, बी.डी. मानिकपुरी,आर. के.साहू, एस. सी.भटनागर, शरद अग्रवाल, आदि ने कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसके माध्यम से पेंशनरों के हितों से जुड़े मुद्दों को सीधे आयोग तक पहुंचाया जा सकता है और आने वाले समय में न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित किया जा सकता है ।
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