सुल्तानपुर 2 अप्रैल (आरएनएस )। स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक साथ 6 चिकित्सकों समेत 43 कर्मचारियों को बिना स्पष्ट कारण बताओ नोटिस के रिलीव किए जाने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर संकट गहरा गया है। इस अचानक लिए गए निर्णय से न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि आम मरीजों में भी भारी असंतोष और चिंता का माहौल बन गया है। सुल्तानपुर जनपद का जिला चिकित्सालय जो आसपास के जिलों की अपेक्षा बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सभी लोगों को प्रदान करता था वह अब जिला अस्पताल नहीं रहा जिला चिकित्सालय का अस्तित्व 1 अप्रैल से समाप्त हो गया है यहां के जनप्रतिनिधि जिला चिकित्सालय को बचाने में असफल रहे। आगे देखिए जिला अस्पताल कहीं बनता है कि जनपद वासियों का इलाज स्वशासी मेडिकल कॉलेज में ही होता रहेगा जहां पर मरीजों का इलाज सशुल्क होगा अभी भी मरीज को इलाज के लिए अच्छा खासा पैसा देना पड़ता है अगर मरीज सुविधा शुल्क नहीं देता तो उसे ऑपरेशन जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती है। जो लोग सुविधा शुल्क देते हैं उनका काम आसानी से हो जाता है। बताया जा रहा है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्राचार्य द्वारा यह कार्रवाई की गई, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है और वे अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। बिना कारण के रिलीज किए गए कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय में जाकर अपनी जोइनिंग दे रहे हैं इनमें से अधिकतर कर्मचारियों का रिटायरमेंट नजदीक है ऐसे लोगों को दूर-दराज पटक दिया गया। आठ चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग के और अपनी सेवाएं दे रहे हैं जिसमें से सात चिकित्सक अपनी निजी क्लीनिक या नर्सिंग होम चलाने में व्यस्त है। इधर, मेडिकल कॉलेज में पहले से तैनात कई चिकित्सकों पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि वे सरकारी दायित्वों की अनदेखी कर अपने-अपने निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों में अधिक समय दे रहे हैं। एक चिकित्सक तो ऐसे हैं कि वह पिछले तीन सालों से कभी ओपीडी कक्ष में बैठे ही नहीं है वह ओपीडी आवर में अपने नर्सिंग होम में सेवाएं देते हैं और तनख्वाह सरकार से लेते हैं। इनके खिलाफ प्राचार्य भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में स्टाफ की कमी और डॉक्टरों की अनुपलब्धता ने हालात को और भी गंभीर बना दिया है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा में है। सुल्तानपुर के सांसद, पांच विधायक और एक एमएलसी जिनमें अधिकांश सत्तारूढ़ दल से जुड़े हैं। अब तक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को सुधारने में सफल नहीं हो सके हैं। आगामी 2027 के चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर विधायक के सामने क्या मामला आया उन्होंने शासन को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा है। स्थिति यह है कि जो जिला चिकित्सालय कभी गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए मुफ्त इलाज का बड़ा सहारा था, अब वहां भी इलाज महंगा होने की आशंका बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ेगा। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और रिलीव किए गए कर्मचारियों के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि आम जनता को बेहतर और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिल सके।
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