कुशीनगर, 02 अप्रैल (आरएनएस)। महापरिनिर्वाण
स्थली कुशीनगर में आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय बुद्धिष्ठ कॉन्क्लेव के तीसरे दिन मुख्य मंदिर परिसर में युद्ध के समय में बुद्ध की प्रासंगिकता विषयक पर परि चर्चा का आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र में देश-विदेश से आए विद्वानों, बौद्ध भिक्षुओं, शोधकर्ताओं एवं चिंतकों ने सहभागिता करते हुए वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भगवान बुद्ध के शांति, करुणा एवं अहिंसा के सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि आज जब विश्व विभिन्न प्रकार के संघर्षों एवं युद्धों की परिस्थितियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग, सहिष्णुता तथा संवाद की भावना मानवता को नई दिशा प्रदान कर सकती है। परिचर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बुद्ध के उपदेश केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता एवं वैश्विक शांति की स्थापना में भी अत्यंत उपयोगी हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियों में संवाद, धैर्य एवं करुणा के मार्ग को अपनाकर स्थायी समाधान प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने विषय के प्रति गहरी रुचि दिखाई तथा सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपने विचार साझा किए। यह सत्र कॉन्क्लेव के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा। जिसने वैश्विक शांति एवं सह-अस्तित्व के संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विधायक फाजिलनगर सुरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपने उद्बोधन में सभी आगंतुकों, विद्वानों एवं श्रद्धालुओं का
अभिनंदन करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की महा परिनिर्वाण स्थली होने के कारण कुशीनगर विश्व पटल पर विशेष महत्व रखता है तथा ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से जनपद की पहचान और अधिक सुदृढ़ होती है। उन्होंने कहा कि यह कॉन्क्लेव न केवल बौद्ध धर्मावलंबियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन संवर्धन एवं निवेश के नए अवसर भी सृजित करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान बुद्ध के शांति, करुणा एवं अहिंसा के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण एवं रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
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