नई दिल्ली,02 अप्रैल (आरएनएस)। आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गेनाइजेशन , जो नो प्रॉफिट नो लॉस के सिद्धांत पर स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्था है, लंबे समय से सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के आवासीय सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। इस संस्था द्वारा देशभर में सैन्य परिवारों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना एक सराहनीय उपलब्धि रही है। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने सैन्य समुदाय के बीच गंभीर चिंता और असंतोष को जन्म दिया है। यह देखा जा रहा है कि वर्तमान समय में आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गेनाइजेशन द्वारा कोई नई आवासीय योजनाएँ प्रारंभ नहीं की जा रही हैं। ऐसे समय में, जब महानगरों में रियल एस्टेट की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और प्रतिस्पर्धा तीव्र होती जा रही है, सैन्य कर्मियों के लिए स्वयं का घर खरीदना अत्यंत कठिन होता जा रहा है। स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब यह जानकारी सामने आती है कि जयपुर में आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गेनाइजेशन द्वारा पूर्व में खरीदी गई एक बड़ी भूमि का उपयोग आवास निर्माण के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसे पुन: उसी पक्ष को बेचने पर विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार, कोलकाता में भी ऐसी ही प्रक्रिया अपनाए जाने की सूचना है, जहां जमीन को उसी विक्रेता को वापस बेचा जा रहा है जिससे उसे खरीदा गया था। इस प्रकार की संभावित कार्यवाही सैन्य समुदाय में निराशा एवं अविश्वास की भावना को बढ़ा रही है। सैन्य समुदाय को विश्वास है कि संबंधित प्राधिकरण इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाएंगे और आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गेनाइजेशन के मूल उद्देश्य—देश की सेवा में समर्पित सैनिकों को सुलभ एवं किफायती आवास उपलब्ध कराना—को पुन: सुदृढ़ करेंगे।
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