नईदिल्ली ,03 अपै्रल (आरएनएस)। जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 गुरुवार को संसद से पारित हो गया है। इस कानून का उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाना और कई क्षेत्रों में अनुपालन को व्यवस्थित करना है। यह विधेयक 1 अप्रैल को लोकसभा और 2 अप्रैल को राज्यसभा से पारित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये विधेयक विश्वास पर आधारित ढांचे को मजबूत करता है। आइए विधेयक की बड़ी बातें जानते हैं।
विधेयक में 23 मंत्रालयों के 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है। इनमें से 717 प्रावधानों को व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है। बाकी 67 ऐसे संशोधन किए गए हैं, जिनका लक्ष्य जीवन सुगमता को बेहतर बनाना है। इसमें कोयला, वाणिज्य एवं उद्योग, शिपिंग, शहरी विकास और परिवहन सहित 23 मंत्रालयों से जुड़े कानून शामिल हैं।
विधेयक की सबसे अहम बात है कि इसमें कई अपराधों के लिए कारावास के प्रावधानों को जुर्माने से बदला गया है। उदाहरण के लिए औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत, सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण या बिक्री से संबंधित उल्लंघनों के लिए पहले एक साल की जेल, 20,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अब इसे एक लाख रुपये के जुर्माने या जब्त किए गए माल के मूल्य के 3 गुना से बदला गया है।
अब तक सड़कों पर पेशाब करना या गंदगी फैलाना एक क्रिमिनल ऑफेंस था, जिसमें 50 रुपये का जुर्माना लगता था। अब ये अपराध दंडनीय कहा जाएगा और जुर्माना 500 रुपये लगेगा। पुलिस अब इसके लिए बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। मेट्रो ट्रेन या स्टेशन पर सिगरेट पीना पहले एक आपराधिक मामला था। अब यह दीवानी उल्लंघन होगा। ऐसा करने पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा और यात्री का टिकट जब्त कर लिया जाएगा।
ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता रिन्यू कराने में देरी अपराध के दायरे से बाहर होगी। अब ड्राइविंग लाइसेंस वैधता खत्म होने के बाद 30 दिन तक वैध रहेगा। अभी तक बिना बीमे के वाहन चलाने पर 3 महीने की जेल या 2,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान था। अब जेल की सजा नहीं होगी। अब बेस इंश्योरेंस प्रीमियम का 3 गुना या 5,000 रुपये (जो ज्यादा हो) जुर्माना लगेगा। दोबारा पकड़े जाने पर प्रीमियम का 5 गुना या 10,000 रुपये देना होंगे।
विधेयक में कुछ अपराधों को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। इनमें दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 के तहत आग की झूठी सूचना देना, दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना और कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत कॉपीराइट रजिस्टरों में गलत जानकारी देना शामिल हैं। ज्यादातर अपराधों में पहली बार दोषी पाए जाने पर सुधार का मौका दिए जाने का प्रावधान है। दूसरी बार नियम तोडऩे पर भारी जुर्माना लगेगा।
विधेयक के तहत, सरकारी परिसरों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों को पहले महीने में संबंधित संपत्ति के लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना देना होगा। ये हर महीने 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता जाएगा। वहीं, अगर कोई सार्वजनिक गैर-आवासीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करता है, तो उसे 6 महीने तक की जेल या भूमि के मूल्य का हर वर्ष के हिसाब से 5 प्रतिशत तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।
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