-कुमारगंज पुलिस एवं विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र के सुसाइड नोट को दबाने में जुटा
-मृतक छात्र के पिता ने मामले में मुकदमा कायम किए जाने हेतु पुलिस को दी तहरीर
-छात्रावास के चीफ वार्डन की कार्यशैली पर उठ रही उंगलिया
अयोध्या 3 अप्रैल (आरएनएस)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अंतर्गत उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में अध्यनरत बीएससी तृतीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र अनिल तिवारी की संदिग्ध मौत का मामला आप पूरी तरह से गरमाता नजर आ रहा है। क्योंकि छात्र के कमरे में पुलिस के हाथ लगे सुसाइड नोट को स्थानीय पुलिस एवं विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से हजम करने में जुट गया है। वहीं दूसरी ओर दिवंगत छात्र के पिता ने मामले में मुकदमा काम किए जाने हेतु कुमार बिन पुलिस को तहरीर देकर न्याय की गुहार की है।
बताते चलें कि बीते दो अप्रैल को कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अंतर्गत उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में अध्यनरत बीएससी तृतीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र अनिल तिवारी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में अमरावती हॉस्टल के रूम नंबर 9 में छत के पंखे से गमछे के सहारे फांसी के फंदे से लटका मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में अफरा तफरी मच गई थी और भारी संख्या में कुमारगंज थाने की पुलिस एवं विश्वविद्यालयके सुरक्षा गार्ड सहित विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदों का दायित्व निभाने वाले शिक्षकगण मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम बुलाकर गहन छानबीन करवाने के उपरांत छात्र का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे छात्र के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। क्योंकि मृतक छात्र अनिल तिवारी अपने पिता का इकलौता बेटा था । पिता जीवन नाथ तिवारी आइसक्रीम बेंचकर अपने बेटे को अच्छे शिक्षा दिलाने के लिए कृत संकल्पित थे। मौके पर पहुंची पुलिस के हाथ छात्र के कमरे से एक सुसाइड नोट भी हाथ लगा था और तत्क्षण छात्र के कमरे में मौजूद पुलिस कर्मियों ने सुसाइड लोड मिलने की जानकारी भी दबी जुबान से मीडिया को दी थी। लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव में आकर पुलिस भी सुसाइड नोट को हजम करने में जुटी है। उधर घटना के बाद छात्र के पिता ने मामले में मुकदमा काम किए जाने हेतु पुलिस को एक तहरीर दी है। कल तक सुसाइड नोट मिलने की बात कहने वाली कुमारगंज पुलिस ने अब दूसरा राग अलापना शुरू कर दिया है। पुलिस का कहना है कि फिंगर प्रिंट टीम सुसाइड नोट को अपने साथ ले गई है। वहीं दूसरी ओर घटना को लेकर तमाम अनसुलझे सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहे हैं। जिसमें विश्वविद्यालय के दिव्यांग प्रभारी सुरक्षा अधिकारी डॉ विनोद कुमार सिंह का घटना के दिन विश्वविद्यालय से गायब रहना, अमरावती हॉस्टल के चीफ वार्डन डॉ जसवंत सिंह का शिक्षण कार्य से विमुख होकर विश्वविद्यालय के कुलपति के निजी सचिव के पद का अतिरिक्त दायित्व संभालते हुए हॉस्टल की जिम्मेदारी नजरअंदाज करना सहित कई सवाल शामिल हैं। और तो और सबसे मजे की बात तो यह है कि विश्वविद्यालय परिसर में इतनी बड़ी घटना घट जाने के बावजूद भी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति डॉ विजेन्द्र सिंह का मौके तक न पहुंचाना एक बड़ी संवेदनहीनता को इंगित कर रहा है। फिलहाल आगे की कार्यवाही तो भविष्य के घर में है लेकिन स्थानीय पुलिस एवं विश्वविद्यालय प्रशासन पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने में आगे की कौन सी कार्यवाही अमल में लेगा इस पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।
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