प्रयागराज में एक साल में 1500 किसानों ने छोड़ी केमिकल फर्टिलाइजर युक्त खेती
प्रयागराज,04 अपै्रल (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कम लागत, ज्यादा लाभ वाले कृषि मॉडल पर कार्य कर रही है। इसके लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के मॉडल पर सरकार कार्य कर रही है जिन पर किसानों को अधिक खर्च करना पड़ता है। इसके लिए प्राकृतिक खेती का मॉडल अपनाया गया है जिसका रास्ता जैविक खेती से होकर जाता है। प्रयागराज में बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं।
रसायन युक्त खेती में उर्वरकों और कीट नाशकों में आने वाली लागत किसान के लिए एक तरफ समस्या बन रही है तो दूसरी तरफ अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से बंजर हो रही भूमि ने उसकी चिंता बढ़ा दी है। प्रयागराज में क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक पीयूष राय का कहना है कि जिले में रवि और खरीफ के समय नमूने एकत्र करने के बाद उनकी जांच के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा निर्धारित मानक में न्यूनतम से भी काफी नीचे पहुंच गई है। ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा तय न्यूनतम मात्रा 0.5 से 0.75 प्रतिशत से बहुत नीचे पहुंच गई है। प्रयागराज के उप निदेशक कृषि पवन कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि कि वर्ष 2020-21 की अपेक्षा वर्ष 2023-24 में गेहूं को उत्पादकता 28.15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से घटकर 24.04 हो गई है। इसी तरह मक्का 18.25 से 12.89, जौ 20.4 से 16.5, बाजरा 12.32 से 09.13 और धान 31.90 से 28.40 पहुंच गया है। इससे निपटने के लिए ही किसान अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग वाली खेती से दूर हो रहा है। जिले में 1500 किसानों ने एक साल में इससे दूरी बनाते हुए प्राकृतिक खेती पर भरोसा दिखाया है।
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जिले में 11,136 किसानों ने अपनाया जैविक खेती
जिले में गंगा नदी के 5 किमी के दायरे में 411 क्लस्टर में जैविक खेती की जा रही है। जनपद में अब तक इसका विस्तार 8220 एकड़ तक हो चुका है। अब इन किसानों को गोवंश आधारित पूरी तरह रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले में इसके लिए 12 क्लस्टर बनाए गए हैं जिसमें हर क्लस्टर में 125 किसानों को रखा गया है। इस तरह पहले चरण में इन 1500 किसानों की 600 हेक्टेयर की भूमि को पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन किसानों को सरकार की तरफ से हर साल आर्थिक सहयोग दिया जाता है। तीन वर्षों तक यह सहयोग दिया गया है जिसमें पहले साल प्रति एकड़ 4800 और अगले दो वर्षों में 3600 प्रति वर्ष के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया गया। इसके अलावा जैविक बीज प्रबंधन के लिए भी सरकार धन आबंटित कर रही है ।
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