नई दिल्ली,04 अपै्रल (आरएनएस)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और जरूरी जगहों पर लगे चीनी कैमरों के जरिए विदेशी निगरानी की सच्चाई को छिपाने की कोशिश करके हर भारतीय की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है.
उन्होंने फेसबुक पर हिंदी में एक पोस्ट में कहा, यह भारत को अंधेरे में रखने की एक सोची-समझी साजिश है. गांधी ने कहा कि सरकार ने हाल ही में चीनी सीसीटीवी कैमरों के पब्लिक इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है. उन्होंने कहा, फिर भी सरकारी इमारतों के अंदर चीनी कैमरे लगे हुए हैं.
बैन किए गए चीनी ऐप्स बदले हुए नामों से फिर से सामने आ रहे हैं. विदेशी एआई प्लेटफॉर्म सेंसिटिव डेटा प्रोसेस कर रहे हैं और सरकार के पास इस बारे में कहने के लिए बिल्कुल कुछ नहीं है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि उन्होंने ये सवाल संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से पूछे थे. उन्होंने दावा किया, जवाब में बहुत सारी बातें थीं, लेकिन पूछे गए खास सवालों के कोई जवाब नहीं दिए गए.
हमारे कैमरे किन देशों से आए हैं? उनमें से कितने सिक्योरिटी के नजरिए से सर्टिफाइड हैं? कौन से विदेशी एआई प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं? कौन से बैन किए गए ऐप बदले हुए नामों से चल रहे हैं? गांधी ने कहा, मिनिस्ट्री के जवाब में कोई आंकड़े नहीं थे, कोई जवाब नहीं था. यहां तक कि एक भी प्लेटफॉर्म का नाम नहीं था.
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह मानने के पांच साल बाद कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दस लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर को लेकर रिस्क पैदा करते हैं. सरकार अभी भी यह बताने में नाकाम रही है कि आज हमारी निगरानी करने वाले कैमरे सुरक्षित हैं या नहीं.
गांधी ने कहा, अपनी नाकामियों को छिपाने और विदेशी निगरानी की सच्चाई को छिपाने की कोशिश करके, मोदी सरकार हर एक नागरिक की सिक्योरिटी को खतरे में डाल रही है. गांधी ने 25 मार्च को लोकसभा में एक अतारांकित सवाल पूछा था और इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जवाब दिया कि भारत सरकार डिजिटल टेक्नोलॉजी से होने वाले साइबर सिक्योरिटी रिस्क के बारे में जागरूक है. प्रसाद ने कहा कि पिछले 12 सालों में भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कोशिशें की गई हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है.
उन्होंने गांधी के सवाल के जवाब में जासूसी के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों की लिस्ट दी थी, जिसमें भारत के टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा, नेटवर्क सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन पर कानूनी फ्रेमवर्क को मजबूत करना और सीसीटीवी सिस्टम की सिक्योरिटी को मजबूत करना शामिल था.
मंत्री ने कहा कि टेलीकॉम नेटवर्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे जरूरी हिस्सा हैं. 2021 में सरकार ने ट्रस्टेड सोर्स पर नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टिव को लागू करने के लिए एक अहम कदम उठाया. यह पक्का करता है कि देश में टेलीकॉम नेटवर्क में सिर्फ ट्रस्टेड सोर्स से ही टेलीकम्युनिकेशन इक्विपमेंट लगाए जाएं.
उन्होंने कहा, सरकार ने नेटवर्क सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े कानूनी ढांचे को मजबूत किया है. सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 को नोटिफाई किया है, जिसमें देश में टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क की सिक्योरिटी के लिए बड़े प्रोविजन हैं और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2022 को नोटिफाई किया है, जिसमें पर्सनल डेटा की सुरक्षा पक्का करने के लिए कानूनी ढांचा है.
सीसीटीवी सिस्टम की सिक्योरिटी मजबूत करने पर मंत्री ने कहा, सरकार ने सीसीटीवी सिस्टम की सिक्योरिटी मजबूत करने के लिए बड़े सुधार किए हैं और भारतीय बाजार में सीसीटीवी के लिए जरूरी शर्तों को नोटिफाई किया है.
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