0-दिग्गज हिंदुस्तानी गायक पं. मुकुल शिवपुत्र की खयाल प्रस्तुति रही समापन संध्या का मुख्य आकर्षण
नई दिल्ली, 05 अप्रैल (आरएनएस)। एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘भीलवाड़ा सुर संगमÓ का 13वां संस्करण 5 अप्रैल को कमानी ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में एक शानदार संगीत संध्या के साथ संपन्न हुआ। पहले दिन की सफल शुरुआत के बाद, दूसरे दिन भी संगीत प्रेमियों, रसिकों और कला सराहकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिसने इस दो दिवसीय आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
शाम की शुरुआत समन्वय सरकार की आकर्षक सितार प्रस्तुति से हुई। उनकी प्रस्तुति में तकनीकी कुशलता और भावनात्मक गहराई का संतुलित संगम देखने को मिला। वहीं रागों की प्रस्तुति पर उनकी मजबूत पकड़ और लय की सूक्ष्म समझ ने श्रोताओं के साथ गहरा जुड़ाव बनाया। अपनी प्रस्तुति के बाद समन्वय सरकार ने कहा, भीलवाड़ा सुर संगम में प्रस्तुति देना हमेशा खास होता है, क्योंकि यहां के श्रोता संगीत को गहराई से समझते और खुले मन से सुनते हैं। इससे कलाकार को राग की आत्मा को पूरी तरह व्यक्त करने का अवसर मिलता है। उन्होंने आगे कहा, आज श्रोताओं की ऊर्जा और ध्यान ने इस प्रस्तुति को मेरे लिए बेहद संतोषजनक बना दिया। शाम का मुख्य आकर्षण दिग्गज हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक (खयाल) पं. मुकुल शिवपुत्र की प्रस्तुति रही। अपनी आत्ममंथन और आध्यात्मिकता से भरी शैली के लिए पहचाने जाने वाले पंडित मुकुल ने श्रोताओं को एक ध्यानपूर्ण संगीत अनुभव में ले गए। उनकी प्रस्तुति में जटिल आलाप और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की ऊंचाई को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा हर साल आयोजित किया जाने वाला यह उत्सव भारत की शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा देने और कलाकारों व श्रोताओं के बीच सार्थक संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल बना हुआ है।
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