नई दिल्ली ,06 अपै्रल ,। तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए अब एक बेहद हाईटेक तकनीक पर काम चल रहा है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर जल्द ही ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशनÓ नाम का एक नया सिस्टम लाने वाली हैं, जिसके बाद ओटीपी चोरी होने पर भी जालसाज आपके बैंक खाते में सेंध नहीं लगा पाएंगे। यह नई तकनीक मौजूदा वन-टाइम पासवर्ड (ह्रञ्जक्क) का एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प बनने जा रही है। फिलहाल यह सिस्टम टेस्टिंग फेज में है और इसके पूरी तरह लागू होते ही साइबर क्रिमिनल्स के सारे हथकंडे फेल हो जाएंगे, क्योंकि बैंक किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन को पलक झपकते ही ब्लॉक कर देंगे।
क्या है साइलेंट ऑथेंटिकेशन?
इस नई और आधुनिक तकनीक को बैंकिंग सेक्टर के लिए एक्स्ट्रा लेयर ऑफ ऑथेंटिकेशन का नाम दिया जा रहा है। मौजूदा समय में ऑनलाइन पेमेंट या किसी भी ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए यूजर्स को पासवर्ड के साथ-साथ अपने मोबाइल पर आने वाले ओटीपी को वेरिफाई करना होता है। ऐसे में जालसाज सिम स्वैप या कॉल फॉरवर्डिंग जैसी ट्रिक्स का इस्तेमाल करके लोगों के बैंक अकाउंट आसानी से खाली कर रहे हैं। अगर किसी हैकर के पास आपके कार्ड की डिटेल और मोबाइल नंबर का एक्सेस पहुंच जाता है, तो वह पल भर में आपकी गाढ़ी कमाई उड़ा लेता है। पिछले कुछ महीनों में इस तरह के फ्रॉड के ढेरों मामले सामने आए हैं, जिसमें लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा है। इसी बड़े खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए बैंक और टेलीकॉम कंपनियां इस नए समाधान पर काम कर रही हैं।
बैकग्राउंड में कैसे काम करेगा यह स्मार्ट सिस्टम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक पूरी तरह से बैकग्राउंड वेरिफिकेशन पर आधारित होगी। इसमें स्क्रीन पर हैकर्स को भनक तक नहीं लगेगी कि बैंक उनके ट्रांजैक्शन पर गुप्त रूप से नजर रख रहा है। इस सिस्टम में असली यूजर की पहचान करने के लिए बैंक अकाउंट और ओटीपी के साथ-साथ मोबाइल डिवाइस की आईडी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। जैसे ही बैंक खाते से कोई ट्रांजैक्शन शुरू होगा, बैंक रियल टाइम में यह वेरिफाई कर लेगा कि रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर वाला असली डिवाइस एक्टिव स्टेटस में है या नहीं।
टेलीकॉम ऑपरेटर देंगे डिवाइस की सटीक जानकारी
ट्रांजैक्शन के वक्त डिवाइस के एक्टिव स्टेटस की यह सटीक जानकारी टेलीकॉम ऑपरेटर के जरिए सीधे बैंक तक पहुंच जाएगी। इस तरह से बैंक को तुरंत पता चल जाएगा कि जो व्यक्ति ट्रांजैक्शन कर रहा है वह असली ग्राहक है या कोई हैकर किसी अन्य डिवाइस के माध्यम से इसे अंजाम दे रहा है। अगर ट्रांजैक्शन के वक्त असली डिवाइस एक्टिव नहीं मिलता है, तो बैंक तुरंत उस ट्रांजैक्शन को ब्लॉक कर देगा और आपका पैसा सुरक्षित रहेगा। फ्रॉड रोकने के लिए दूरसंचार विभाग की तरफ से भी पिछले काफी समय से इस खास तकनीक पर काम किया जा रहा है।
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