लालगंज, मीरजापुर 6 अप्रैल (आरएनएस)। ग्राम न्यायालय में तैनात न्यायाधीश जीनत परवीन के स्थानांतरण की चर्चा के बीच उनकी कार्यशैली का मानवीय पक्ष सामने आया है। सोमवार को न्यायालय परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने एक ऐसे मामले का जिक्र किया जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
न्यायाधीश ने बताया कि 90 वर्षीय बुजुर्ग पिता ने अपनी जमीन पहले ही दोनों बेटों में बांट दी थी। इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति से विवाद हो गया और मामला न्यायालय पहुंच गया। बुजुर्ग ने बेटों से साथ देने की बात कही पर दोनों ने किनारा कर लिया।मामला बढ़ा और न्यायालय के आदेश पर बुजुर्ग को जेल जाना पड़ा। दीपावली जैसे त्योहार पर भी पुत्र जमानत के लिए आगे नहीं आए। करीब दस दिन तक बुजुर्ग को जेल में रहना पड़ा।मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश जीनत परवीन ने व्यक्तिगत संज्ञान लिया। एक अधिवक्ता से समन्वय कर पहल की। इसके बाद बुजुर्ग को मुकदमे से राहत मिली। इस पहल ने न्याय व्यवस्था के मानवीय पक्ष को सामने लाया। न्यायाधीश ने बताया कि ग्राम न्यायालय में आने वाले अधिकांश मामलों में महिलाएं वादी होती हैं। घरेलू विवाद संपत्ति के झगड़े और सामाजिक तनाव से जुड़े मामलों में न्यायालय कानूनी समाधान के साथ सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास करता है।ग्राम न्यायालय की यह तस्वीर दिखाती है कि न्याय केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं है बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से भी जुड़ा है।
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