0-राष्ट्रीय सिविल इंजीनियरिंग नवाचार मंच के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत किया
चेन्नई, 06 अप्रैल (आरएनएस )। बिल्डिंग भारत संपर्क का तीसरा फ्लैगशिप संस्करण आईआईटी मद्रास में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह तीन आईआईटी संस्थानों की श्रृंखला का अंतिम चरण था, जो समय के साथ सिविल इंजीनियरिंग नवाचार के एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ है। आईआईटी मद्रास को अकादमिक साझेदार के रूप में शामिल करते हुए, इस अंतिम संस्करण ने आईआईटी गांधीनगर और आईआईटी कानपुर में आयोजित पिछले संस्करणों की गति को आगे बढ़ाया। इस पहल ने सिविल इंजीनियरिंग शिक्षा, उद्योग और नवाचार के बीच एक सशक्त और सुव्यवस्थित सेतु के रूप में अपनी पहचान और मजबूत की है। आईआईटी मद्रास में 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित इस संस्करण में 800 से अधिक छात्रों की भागीदारी दर्ज की गई, जिसमें लगभग 100 हैकाथॉन प्रविष्टियाँ शामिल थीं। इसके साथ ही, अकादमिक एवं उद्योग विशेषज्ञों द्वारा संचालित मास्टरक्लास, टाउनहॉल और समस्या-समाधान सत्रों की एक श्रृंखला भी आयोजित की गई। कार्यक्रम की रूपरेखा—जिसमें निर्माण गुणवत्ता, निर्माण सुरक्षा, निर्माण स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), लचीले (रेजि़लिएंट) इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण तथा इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट प्रबंधन में नवाचार जैसे विषय शामिल थे—यह दर्शाती है कि यह पहल अब केवल जागरूकता-आधारित सहभागिता तक सीमित न रहकर परिणाम-उन्मुख सीख और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग की दिशा में स्पष्ट रूप से अग्रसर हो रही है। एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (इंडिया) के नेतृत्व में तथा जेएसडब्ल्यू ग्रुप द्वारा प्रस्तुत इस पहल को भारत सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजऱ के कार्यालय (मंथन प्लेटफॉर्म के माध्यम से) का समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही, एनआईयूए और एआईसीटीई इस पहल के साझेदार के रूप में जुड़े हैं। साथ ही, यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय और सुदृढ़ दिशा के एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।
अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) द्वारा हैकाथॉन-कम-स्टार्टअप कॉन्टेस्ट को समर्थन मिलने के साथ यह प्लेटफॉर्म अब केवल आइडिएशन तक सीमित नहीं रहा है। यह पहल अब मेंटरशिप, वैलिडेशन और संभावित इनक्यूबेशन सपोर्ट जैसे संरचित मार्गों के माध्यम से आगे बढ़ते हुए एक व्यापक और परिणाम-उन्मुख दिशा में स्थापित हो रही है। लगातार आयोजित संस्करणों में भागीदारी के बढ़ते स्तर और गहराई एक स्पष्ट बदलाव का संकेत देते हैं—जहां पहले अलग-थलग सहभागिता थी, वहीं अब एक संरचित नवाचार इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। तीनों आईआईटी संस्करणों के दौरान इस पहल में 2000 से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए, जिनमें 1300 से अधिक पुरुष और 700 से अधिक महिला प्रतिभागी शामिल थे, जो इसके व्यापक स्तर और बढ़ती विविधता को दर्शाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वृद्धि वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान और उद्योग-संरेखित सोच की दिशा में एक गहरे बदलाव का संकेत भी देती है। इस पहल के उद्देश्य पर बात करते हुए, डॉ. राजनीश दासगुप्ता, ट्रस्टी एवं महानिदेशक, एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (भारत) तथा नेशनल डायरेक्टर, बिल्डिंग भारत संपर्क, ने कहा, बिल्डिंग भारत संपर्क को आईआईटी मद्रास तक लाना एक सोच-समझकर लिया गया महत्वपूर्ण कदम है। आईआईटी मद्रास ने देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रथाओं के विकास में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और यह भारत में सिविल इंजीनियरिंग की वास्तविक विविधता और व्यापकता को प्रदर्शित करने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान करता है। लंबे समय तक सिविल इंजीनियरिंग मुख्यत: क्रियान्वयन (एक्ज़ीक्यूशन) तक सीमित रही है। बिल्डिंग भारत संपर्क जो कर रहा है, वह है नवाचार को मुख्यधारा में लाना—छात्रों को केवल निर्माण करने के लिए ही नहीं, बल्कि सोचने, प्रश्न करने और बड़े स्तर पर वास्तविक दुनिया की इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रेरित करना। भागीदारी में जो बदलाव हम देख रहे हैं, वह सबसे उत्साहजनक पहलुओं में से एक है। बड़ी संख्या में महिला सिविल इंजीनियरिंग छात्राएँ आगे आ रही हैं—सिर्फ दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि बिल्डिंग भारत में समान भागीदार के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। देश को बनाना है, कुछ कर के दिखाना है और प्तस्द्धद्गक्चह्वद्बद्यस्रह्यस्द्धद्गस्श्चद्गड्डद्मह्य जैसे अभियानों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रतिनिधित्व केवल संख्या तक सीमित न रहे, बल्कि नेतृत्व में भी परिवर्तित हो, और भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोगात्मक रूप से निर्मित हो। अटल इनोवेशन मिशन के समर्थन से आयोजित हैकाथॉन-कम-स्टार्टअप कॉन्टेस्ट के साथ, यह प्लेटफॉर्म अब केवल एक पहल से आगे बढ़कर एक संरचित राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले रहा है—जो यह पुनर्परिभाषित कर रहा है कि युवा इंजीनियर कैसे सीखते हैं, नवाचार करते हैं और भारत के निर्माण में अपना योगदान देते हैं। इस पहल के महत्व और अकादमिक पार्टनर के रूप में आईआईटी मद्रास की भूमिका को रेखांकित करते हुए, यह सहयोग संस्थान के अनुप्रयुक्त अनुसंधान (एप्लाइड रिसर्च) और उद्योग-समेकित शिक्षा पर केंद्रित दृष्टिकोण के साथ मजबूत सामंजस्य को दर्शाता है।
प्रोफेसर मनु संथानम, डीन (आईसीएसआर), आईआईटी मद्रास ने कहा, आईआईटी मद्रास लगातार उन पहलों का समर्थन करने में अग्रणी रहा है, जो अकादमिक जगत, उद्योग और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के बीच सेतु का कार्य करती हैं, विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। बिल्डिंग भारत संपर्क जैसे प्लेटफॉर्म इस दृष्टिकोण के साथ गहराई से मेल खाते हैं और छात्रों को समकालीन चुनौतियों के साथ सार्थक रूप से जुडऩे के अवसर प्रदान करते हैं। आज सिविल इंजीनियरिंग को पारंपरिक शैक्षणिक ढाँचों से आगे बढ़कर सस्टेनेबिलिटी, उन्नत सामग्री (एडवांस्ड मैटेरियल्स) और आधुनिक निर्माण तकनीकों जैसी उभरती आवश्यकताओं को संबोधित करना होगा। इस प्रकार की पहलें एक संरचित वातावरण प्रदान करती हैं, जहाँ छात्रों को न केवल इन चुनौतियों से अवगत कराया जाता है, बल्कि उन्हें आलोचनात्मक सोच विकसित करने, प्रयोग करने और वास्तविक दुनिया से जुड़े उपयोगी समाधान विकसित करने के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाता है। मेंटॉरशिप, मास्टरक्लास और उद्योग के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह समझ भी विकसित करते हैं कि उनके विचार वास्तविक प्रभाव में कैसे परिवर्तित हो सकते हैं। हम जिस स्तर और गहराई की भागीदारी देख रहे हैं, वह एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है—आज के छात्र केवल इंजीनियरिंग सीखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके भीतर नवाचार करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं। यह दृष्टिकोण, जब सही इकोसिस्टम का समर्थन प्राप्त करता है, तो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के भविष्य को महत्वपूर्ण रूप से आकार देने की क्षमता रखता है। इस पहल की रूपरेखा में उद्योग सहयोग को हमेशा केंद्रीय स्थान दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों के विचार अलग-थलग विकसित न हों, बल्कि वे वास्तविक दुनिया की इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों और उनके कार्यान्वयन के व्यावहारिक मार्गों के साथ बेहतर रूप से जुड़े रहें।
श्री रिंकेश रॉय, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, ने कहा, तीन आईआईटी की इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि जब अकादमिक जगत और उद्योग एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ साथ आते हैं, तो क्या संभव हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात जो उभरकर सामने आती है, वह केवल भागीदारी का स्तर नहीं, बल्कि छात्रों की सोच की गहराई और वह गंभीरता है, जिसके साथ वे वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों को समझने और सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
अब, जब राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित हो चुका है, यह पहल भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक सतत नवाचार पाइपलाइन तैयार करने की क्षमता रखती है—जो विचारों, प्रतिभा और क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ती है। तीन आईआईटी संस्करणों के सफल समापन के साथ, बिल्डिंग भारत संपर्क अब केवल एक बूट कैंप के स्वरूप से आगे बढ़कर एक संरचित और स्केलेबल राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो चुका है—जो छात्रों, अकादमिक जगत, उद्योग और नीति-निर्माताओं को एकीकृत करते हुए एक सशक्त नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। एक महत्वपूर्ण अगले चरण की ओर बढ़ते हुए, यह पहल अब जून 2026 में ‘सिविलथॉनÓ के लॉन्च के साथ अपने नए चरण में प्रवेश करेगी—यह एक राष्ट्रीय मंच होगा, जो तीनों संस्करणों के शीर्ष प्रदर्शन करने वाली टीमों को एक साथ लाएगा और सबसे संभावनाशील विचारों को वास्तविक दुनिया में लागू करने तथा प्रभाव उत्पन्न करने के और करीब ले जाएगा।
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