रामानुजगंज, 07 अप्रैल (आरएनएस)। राजपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 343 के निर्माण कार्य की जमीनी हकीकत उस समय सामने आ गई, जब स्वयं विभागीय अधिकारी उसी सड़क से वापस नहीं लौट पाए, जिसका निर्माण उनकी निगरानी में किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग 343 के तहत राजपुर से रामानुजगंज के बीच करोड़ों रुपये की लागत से टू-लेन सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के लिए अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान सड़क की गुणवत्ता और प्रगति का जायजा लिया गया, लेकिन निर्माण कार्य में लापरवाही की झलक एक बार फिर सामने आई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण में लगातार अनियमितताएं बरती जा रही हैं। कई स्थानों पर सड़क इतनी खराब स्थिति में है कि उस पर सामान्य मोटर वाहन का आवागमन भी मुश्किल हो गया है। जबकि नियमों के अनुसार, निर्माणाधीन सड़क को भी इस स्थिति में रखा जाना चाहिए कि आम जनता को आवागमन में परेशानी न हो।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारी खुद उसी मार्ग से वापस नहीं जा सके। उन्हें वैकल्पिक रास्ते से होते हुए वाड्रफनगर होकर लौटना पड़ा। यह स्थिति अपने आप में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
यदि अधिकारी उसी मार्ग से वापस लौटते, तो शायद उन्हें आम जनता की वास्तविक समस्याओं और परेशानियों का अधिक बेहतर अंदाजा होता। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे रोजाना इसी खराब सड़क से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिस सड़क का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग के मानकों के अनुसार होना चाहिए, उसकी स्थिति इतनी खराब है कि अधिकारी स्वयं उस पर चलने से बच रहे हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और कब तक आम जनता को एक सुगम एवं सुरक्षित सड़क उपलब्ध हो पाती है। इस संबंध में जब अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार किया है।
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