रामानुजगंज, 08 अप्रैल (आरएनएस)। रामानुजगंज से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम भवरमाल तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है। खराब और जर्जर सड़क के कारण यहां के लोगों को वर्षों से परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन सबसे ज्यादा असर छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।
रामानुजगंज क्षेत्र से बच्चे रोज़ाना पढ़ाई के लिए डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल जाते हैं। महज 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें 40 मिनट से अधिक समय लग जाता है। रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण सफर थकाऊ ही नहीं, बल्कि कई बार खतरनाक भी हो जाता है।
नन्हे बच्चों की बड़ी परेशानी
सुबह-सुबह भारी बैग लेकर निकलने वाले ये बच्चे रास्ते भर झटकों और धूल से जूझते हैं। बरसात के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं, जब सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। कई बार बच्चे गिरते-पड़ते स्कूल पहुंचते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ता है।
दो रास्ते, दोनों ही परेशान करने वाले
रामानुजगंज से भवरमाल पहुंचने के लिए
एक रास्ता अरागाही होकर जाता है, जो खराब सड़क के कारण समय लेने वाला है
दूसरा रास्ता पुराने वन विभाग लकड़ी डिपो, कमलपुर और केरवासिला होकर जाता है, जो संकरा और कच्चा है
दोनों ही मार्गों की हालत खराब होने से ग्रामीणों के लिए रोज़मर्रा का सफर चुनौती बना हुआ है।
कई बार उठ चुकी है मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा कई बार सड़क निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है।
बच्चों की मार्मिक अपील
अब इस मुद्दे को लेकर गांव के छोटे-छोटे बच्चे भी सामने आए हैं। उनका कहना है—
“हमें अच्छी सड़क दे दीजिए, ताकि हम समय पर और सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें।”
प्रशासन से उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। अगर जल्द ही सड़क का निर्माण या मरम्मत नहीं हुई, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
अब देखना होगा कि बच्चों की यह मासूम गुहार प्रशासन तक कब पहुंचती है और इस जर्जर सड़क को सुधारने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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