रायपुर 8 अप्रैल (आरएनएस) नौकरी दिलाने और फर्जी मेडिकल डिग्री बनाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा पर्दाफाश हुआ है जहां पुलिस ने पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड को दिल्ली से दबोच लिया है, मामला तब सामने आया जब 17 फरवरी 2026 को प्रार्थी संजय निराला ने थाना सिविल लाइन में शिकायत दर्ज कराई कि भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे सहित अन्य आरोपियों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगाने और फर्जी सर्टिफिकेट देने का झांसा देकर उससे और उसके रिश्तेदारों से कुल 2 करोड़ 34 लाख रुपये ठग लिए, शिकायत के आधार पर थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 96/2026 धारा 318(4), 335, 336(2), 338(3), 340(1), 340(2), 3(5), 111 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, प्रारंभिक कार्रवाई में पुलिस ने भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे, साक्षी सिंह और अंकित तिवारी सहित 6 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन जांच के दौरान साक्षी सिंह से पूछताछ और तकनीकी लिंकेज के आधार पर इस पूरे खेल के पीछे छिपे मास्टरमाइंड का सुराग मिला, पुलिस टीम को इनपुट मिला कि साक्षी सिंह दिल्ली में है जिसके बाद टीम ने दबिश देकर उसे पकड़ा और पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह सुनील प्रताप के साथ मिलकर डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ यूनिवर्सिटी पुणे के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्री तैयार करता था, इसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सुनील प्रताप (उम्र 40 वर्ष) निवासी आरजेडजी 352 पालम कॉलोनी द्वारका थाना पालम साउथ वेस्ट नई दिल्ली को गिरफ्तार कर लिया, पूछताछ में सामने आया कि वही इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है और अब तक देश के अलग-अलग राज्यों के 30 से ज्यादा लोगों के लिए फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार कर चुका है, आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है, यह मामला सिर्फ ठगी नहीं बल्कि सिस्टम के साथ खिलवाड़ और लोगों के भविष्य से धोखा है, साफ है कि नौकरी और डिग्री के नाम पर शॉर्टकट का लालच अब सबसे बड़ा जाल बन चुका है जिसमें फंसने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
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