इस्लामाबाद,01 जुलाई। भारत के सिंधु जल संधि रद्द किए जाने के कदम पर पाकिस्तान की बौखलाहट फिर सामने आई है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान ने बीते दिन एक कथित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी और उप प्रधानमंत्री इस्हाक डार समेत कई लोग शामिल हुए। इस दौरान इस्हाक ने कहा कि जल संधि को रद्द करने का भारत का निर्णय अवैध था। वहीं, जरदारी ने फिर परमाणु सिद्धांतों का हवाला दिया।
इस्हाक ने चेतावनी दी कि अगर संधि का पालन नहीं किया गया तो हर विश्व व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा, पानी का इस्तेमाल कभी भी राजनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी पक्ष किसी ऐसी संधि के तहत अपने दायित्वों को एकतरफा रूप से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता जिसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सिंधु संधि केवल जल बंटवारे की व्यवस्था नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सहयोग का महत्वपूर्ण साधन है।
इस्हाक ने आगे कहा, साझा जलक्षेत्र को कभी भी हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसे वर्तमान और भविष्य की पीढिय़ों के लिए सहयोग, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा निर्देशित राष्ट्रों के बीच एक सेतु बने रहना चाहिए। पाकिस्तान को आवंटित जल को मोडऩे या कम करने का कोई भी प्रयास युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। उन्होंने धमकी दी कि पाकिस्तान को जल से वंचित करने का प्रयास क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम लाएगा।
जरदारी ने कहा, पाकिस्तान के जल अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का राष्ट्रीय स्तर पर जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान अपने लोगों के मौलिक अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा। पानी का हथियार के रूप में उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत है। पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत में कुछ चरम परिदृश्यों की पहचान की गई है, जिसमें उसकी अर्थव्यवस्था और जलमार्गों के लिए खतरे शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रीय अस्तित्व का मामला माना गया है।
जरदारी ने कहा, सिंधु नदी कोई दबाव बिंदु नहीं है, सौदेबाजी का जरिया नहीं है, कोई हथियार नहीं है जिसे भारत के हाथों में रखा जा सके। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और उस जीवनरेखा को फांसी का फंदा बनाने का कोई भी प्रयास हमारे राष्ट्र के अस्तित्व के लिए खतरा माना जाना चाहिए। यही संदेश पाकिस्तान को भारत को देना होगा। यही संदेश पाकिस्तान को दुनिया को देना होगा।
भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत ने कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकता। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत को 4 पत्र लिखकर संधि पर चर्चा का अनुरोध किया था। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन की निंदा करते हुए कहा था कि सरकार आतंकवाद प्रायोजित करने वालों तक सिंधु नदी का पानी नहीं पहुंचने देगी।
विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत सिंधु घाटी में बहने वाली 3 पूर्वी नदियों (रवि, सतलज, व्यास) पर भारत का, जबकि 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान का अधिकार है। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति की बैठक में भारत ने इस संधि को रद्द करने का फैसला लिया था।
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