लखनऊ 8 अप्रैल (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा केंद्रीय बजट 2026–27 का विश्लेषण: नीडोनॉमिक्स परिप्रेक्ष्य विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में नीडोनॉमिक्स विचारधारा के प्रवर्तक तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. मदन मोहन गोयल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सनातन नायक ने की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। सर्वप्रथम प्रो. सनातन नायक ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा से अवगत कराया।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने व्याख्यान के आयोजन में विशेष रुचि दिखाने की सराहना की।मुख्य अतिथि प्रो. मदन मोहन गोयल ने 53,47,315 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले केंद्रीय बजट 2026–27 को आवश्यक, लेकिन पर्याप्त नहीं बताते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारत के वित्तीय वर्ष को 1 जुलाई से 30 जून करने का सुझाव दिया, ताकि वित्तीय नियोजन को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप बेहतर ढंग से समायोजित किया जा सके।नीतिगत प्रभावशीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने चेताया कि अत्यधिक रियायतों पर निर्भरता नीतियों को परिवर्तनकारी बनाने के बजाय केवल सांत्वना तक सीमित कर सकती है। करदाताओं के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 2.6 प्रतिशत आयकर देता है, जो सकल घरेलू उत्पाद का 6.68 प्रतिशत योगदान करता है। यह तथ्य सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है।रक्षा व्यय में 15 प्रतिशत वृद्धि को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल बाहरी खतरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें आंतरिक चुनौतियाँ जैसे बेरोजगारी तथा विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में अव्यवस्थाएँ भी शामिल होनी चाहिए, जो “जय जवान, जय किसान” की भावना को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसके नैतिक नियमन, शिक्षा क्षेत्र में प्रभावी उपयोग तथा संतुलित आपूर्ति एवं परिवहन ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।सामाजिक उत्पादकता का आह्वान करते हुए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सरल, नैतिक, क्रियाशील, उत्तरदायी और पारदर्शी बनने का आग्रह किया, ताकि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।व्याख्यान का समापन संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को वित्तीय नीति और राष्ट्रीय विकास पर नीडोनॉमिक्स के समग्र दृष्टिकोण से जानकारी प्रदान की गई।कार्यक्रम के दौरान प्रो. राम चंद्रा, डॉ. वी.एस. बघेल, प्रो. सुरेंद्र मेहर, डॉ. प्रणब कुमार आनंद, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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