शोध समिति, इविवि और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन
प्रयागराज 8 अप्रैल (आरएनएस)। शोध समिति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के गंगानाथ झा परिसर, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परंपरा: शोध पद्धतियां और दृष्टिकोण विषयक एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से शोधार्थियों को भारतीय दृष्टि से अनुसंधान के विविध आयामों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. चंद्रंशु सिन्हा तथा शोध के राष्ट्रीय सह-संयोजक हिमांशु पाण्डेय ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने की।
मुख्य अतिथि अभय प्रताप सिंह ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की शोध दृष्टि हमेशा से लोक कल्याणकारी रही है। हमें औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी मौलिक शोध पद्धतियों को अपनाना होगा। भारतीय ज्ञान परंपरा में सत्य की खोज केवल भौतिक नहीं, बल्कि समग्रता में की गई है। जब शोधार्थी अपनी जड़ों से जुड़कर अनुसंधान करेंगे, तभी भारत पुन: विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा।
मुख्य वक्ता प्रो. चंद्रंशु सिन्हा ने कहा कि शोध आयाम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय दृष्टिकोण से शोध करने की प्रवृत्ति विकसित करना है। वहीं हिमांशु पांडेय ने मनोविज्ञान और व्यवहारिक शोध में भारतीय मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली शोध के असीमित अवसरों से भरी हुई है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शोधार्थी एवं अभाविप के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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