-डॉ. सोनिया दत्ता ने बताया कि कैसे हम सेहत के अन्य कामों की तुलना में दांतों की सफाई को कम महत्व देते हैं और इसमें आयुर्वेद की भूमिका कितनी ज़रूरी है
रांची 8 अप्रैल (आरएनएस)। अक्सर लोग जिम ज्वाइन करके या खान-पान बदलकर अपनी फिटनेस पर तो दोबारा ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की देखभाल (ओरल केयर) को लेकर वैसी गंभीरता नहीं दिखाते। डॉ सोनिया दत्ता, एमडीएस, पीएचडी, प्रोफेसर, पब्लिक हेल्थ डेन्टिस्ट्री, इस अंतर की ओर इशारा करती हैं। उनके अनुसार, बचपन में सीखी गई ब्रश करने की आदतें सालों-साल चलती रहती हैं, जबकि समय के साथ हमारी ज़रूरतें बदल जाती हैं। साथ ही उन्होंने रोज़ाना की ओरल हाइजीन को बेहतर बनाने के लिए डाबर रेड पेस्ट जैसे भरोसेमंद समाधानों के इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया हैं, जो आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक बेहतरीन मेल है। ओरल केयर को अक्सर हल्के में क्यों लिया जाता है? – फिटनेस या वजन में होने वाले बदलावों के विपरीत, दांतों की शुरुआती समस्याएं हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देतीं। समय के साथ, यही लापरवाही कैविटी, मसूड़ों की बीमारी और झनझनाहट (सेंसिटिविटी) के जोखिम को बढ़ा सकती है, यहाँ तक कि उन लोगों में भी जो अपनी सेहत के प्रति काफी जागरूक रहते हैं। आयुर्वेदिक लाभ: परंपरा और विज्ञान का संगम – इन जोखिमों से निपटने के लिए, डॉ. दत्ता एक निरंतर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर ज़ोर देती हैं। आयुर्वेद लौंग और शुंठी (सोंठ) जैसे तत्वों के माध्यम से समय-सिद्ध समाधान प्रदान करता है, जो अपने एंटी-बैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुणों के लिए जाने जाते हैं। डाबर रेड पेस्ट आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर इस कमी को दूर करता है।
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